इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंच पर आंखें मूंदकर राष्ट्रपति का गीत सुनते नजर आए। उन्होंने भी संथाली भाषा में संबोधन कर ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू को श्रद्धांजलि दी।

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राज्यपाल ने इसे जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति और अस्मिता का जीवंत उत्सव बताया। कार्यक्रम में ओलचिकी भाषा के विकास में योगदान देने वाले कई विद्वानों को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। यह आयोजन जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का मजबूत संदेश बना।





