बिहार के गया ज़िले के बाराचट्टी थाना क्षेत्र में अवैध कारोबार का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने का आरोप सामने आया है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक इलाके में गांजा, अफीम और कोयले का अवैध धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

अवैध कोल डिपो से लेकर नशे के कारोबार तक
सूत्रों के मुताबिक बाराचट्टी क्षेत्र में कई अवैध कोल डिपो संचालित हो रहे हैं, जहां से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कोयले का भंडारण और सप्लाई की जा रही है। इसके साथ ही इलाके में नशीले पदार्थों जैसे गांजा और अफीम की तस्करी भी लगातार जारी है, जिससे स्थानीय युवाओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
मुख्य आरोपी कौन?
स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि इस पूरे अवैध नेटवर्क में विकास सिंह, मनोज सिंह औरमहेंद्र ठाकुर की अहम भूमिका बताई जा रही है। आरोप है कि इन लोगों के संरक्षण में ही यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है।
पुलिस की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी गंभीर शिकायतों और आरोपों के बावजूद पुलिस अब तक निष्क्रिय क्यों है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन ना तो अवैध कोल डिपो पर छापेमारी हुई और ना ही नशे के कारोबार पर लगाम लग पाई।
स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश
इलाके के लोगों में इसको लेकर भय और आक्रोश दोनों है। उनका कहना है कि नशे के बढ़ते कारोबार से सामाजिक माहौल खराब हो रहा है, वहीं अवैध कोयला कारोबार से राजस्व को भी भारी नुकसान हो रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
अब स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन और वरीय पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है साथ ही अवैध कोल डिपो को तत्काल सील किया करने की मांग की है।
तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होने से बिहार के युवा तेजी से नशे की चपेट में आ रहे हैं। स्थानीय लोगोंं का कहना है कि
बाराचट्टी क्षेत्र को इस अवैध कारोबार के से जल्द मुक्ति नहीं मिली तो बिहार में पंजाब जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी।
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