अबुआ आवास योजना के बावजूद झारखंड के गोड्डा में मिट्टी में घरों में रहने पर मजबूर हैं लोग। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड अंतर्गत अमौर गांव में यह योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। इस गांव में आज भी कई परिवार वर्षों से मिट्टी और फूस के जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। अबुआ आवास योजना के तहत आवेदन देने साथ ही पंचायत स्तर पर गुहार लगाने के बावजूद उन्हें घर नहीं मिल रहे है।
बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। दीवारें गलने लगती हैं छत टपकती है और हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की इस योजना का लाभ कागजों में तो दिख रहा है लेकिन जरूरतमंदों तक वास्तविक लाभ नहीं पहुंच पा रहा।
कई योग्य ग्रामीण पात्रता पूरी करने के बावजूद सूची में नाम जुड़ने का इंतजार कर रहे हैं। इस संबंध में मेहरमा प्रखंड विकास पदाधिकारी का कहना है कि- हाल ही में कराए गए सर्वे में पात्रता पूरी करने वाले परिवारों को चिन्हित किया गया है। प्रक्रिया जारी है और योग्य लाभुकों को जल्द ही आवास स्वीकृत किया जाएगा। किसी भी पात्रता पूरी करने वाले परिवारो को घर से वंचित नहीं रखा जाएगा। साथ ही बीडीओ ने यह भी कहा कि यदि किसी योग्य व्यक्ति का नाम छूट गया है तो वे प्रखंड कार्यालय में आवेदन देकर फिर से नाम चढ़वा सकते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा धरातल पर अमौर गांव की स्थिति का निरीक्षण कर वास्तविक पात्रता वाले परिवारों को जल्द से जल्द योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। ताकि वे भी सम्मानपूर्वक पक्के घर में रह सकें। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस गंभीर मामले पर कब ठोस कदम उठाते हैं। फिलहाल अमौर के लोग उम्मीद और इंतजार के बीच अपने कच्चे घरों में जिंदगी काटने को मजबूर हैं।
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