दिल्ली पुलिस ने देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) का दफ्तर सील कर दिया है। इतने बड़े मीडिया हाउस पर पुलिस की कार्रवाई ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें जबरन बाहर निकाला गया और महिला स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की भी हुई।

कार्रवाई का कारण
दिल्ली पुलिस ने ये कार्रवाई जमीन आवंटन विवाद के चलते की है। भूमि एवं विकास विभाग (L&DO) ने पहले ही यूएनआई का आवंटन रद्द कर दिया था। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने एजेंसी की याचिका खारिज कर दी और पुलिस को दफ्तर खाली करने का आदेश दिया।
कर्मचारियों के आरोप
यूएनआई के कर्मचारियों का कहना है कि पुलिस ने जबरदस्ती कार्यालय खाली कराया। कर्मचारियों को अपना सामान निकालने का पर्याप्त समय तक नहीं दिया गया। साथ ही महिला स्टाफ के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की भी हुई। कर्मचारियों ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
पुलिस का बयान
दिल्ली पुलिस ने आरोपों का खंडन किया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में की गई। किसी के साथ अनुचित व्यवहार नहीं हुआ। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।
मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद मीडिया संगठनों और पत्रकारों में चिंता बढ़ गई है। कई संगठनों ने प्रेस की स्वतंत्रता और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं। इसने देश में मीडिया की आज़ादी बनाम कानूनी कार्रवाई की बहस को तेज कर दिया है। यूएनआई कार्यालय की सीलिंग कानूनी आदेश के तहत हुई है, लेकिन कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों ने इसे विवादास्पद बना दिया है। अब यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि मीडिया की स्वतंत्रता और सरकारी हस्तक्षेप के बीच बहस का केंद्र बन गया है।
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