ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोलता है तो उसके पावर ग्रिड और एनर्जी फैसेलिटी पर अमेरिका हमला करेगा। इसके लिए ट्रंप ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। वहीं दूसरी ओर ईरान ने लंबी दूरी की मिसाइलों का प्रक्षेपण किया और एक अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुश्मनों के अलावा सबसे के खुला है। वहीं दूसरी ओर इजरायली सेना ने चेतावनी दी है कि ईरान की मिसाइलों की रेंज यूरोपीय राजधानियों तक पहुंच सकती है।

इससे अब लगने लगा है कि आने वाले दिनों में युद्ध की स्थिति और गंभीर होने वाली है। क्योंकि कोई भी पक्ष झुकता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। ट्रंप की इस धमकी का असर सोमवार को दुनियाभर के फाइनेंशियल मार्केट और एनर्जी मार्केट पर देखने को मिल सकता है।
ईरान-अमेरिका तनाव और युद्ध की पृष्ठभूमि
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है। और इसका कारण दोनों देशों के बीच राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक मतभेद हैं। इन मतभेदों की जड़ें 1979 में ईरान क्रांति के समय तक जाती हैं, जब ईरान ने एक इस्लामी गणराज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई और शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को सत्ता से हटा दिया। अमेरिका ने उस समय ईरान के शाह का समर्थन किया था। जिसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई। इसके बाद, ईरान में अमेरिकी दूतावास पर हमला कर 52 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया गया था। जिससे अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंध पूरी तरह से खत्म हो गए थे।
2015 परमाणु समझौता
2015 में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने ईरान के साथ एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता (JCPOA) किया। जिसमें ईरान को परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के बदले आर्थिक प्रतिबंधों में छूट दी गई। इस समझौते पर 2015 में हस्ताक्षर हुआ था। इसका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियारों के विकास से रोकना था।
ट्रम्प का सत्ता में आगमन और JCPOA से बाहर निकलना
2016 में डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद, उन्होंने ईरान परमाणु समझौते (JCPOA:Joint Comprehensive Plan of Action) को “खराब समझौता” कहकर निरस्त कर दिया। 2018 में अमेरिका ने एकतरफा तरीके से इस समझौते से बाहर निकलते हुए ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इसके बाद ईरान ने धीरे-धीरे समझौते के तहत किए गए अपने प्रतिबद्धताओं को तोड़ता गया जैसे कि यूरेनियम संवर्धन में वृद्धि और मध्यपूर्व में अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया।
ईरान-अमेरिका का संघर्ष एक जटिल और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी है। जो केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन चुकी है। वैश्विक बाजार, ऊर्जा आपूर्ति, और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभाव से सभी देश प्रभावित हो सकते हैं। आने वाले समय में यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो यह युद्ध का रूप भी ले सकता है। यानि आने वाले कुछ दिन कफी अहम रहने वाला है।
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