झारखंड में अवैध बालू खनन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। गोड्डा जिले के पत्थरगामा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जारी अवैध खनन गतिविधियों को लेकर कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदीप यादव ने अपने ही सरकार पर अवैध बालू खनन का आरोप लगाया है। और इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। बीजेपी तो सरकार पर हमला बोल ही रही है अब सरकार के सहयोगी दल के नेता ने भी प्रशासन पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने पत्र में विधायक ने आरोप लगाया है कि पत्थरगामा स्थित सनातन बालू घाटों से प्रतिदिन करीब 27 लाख रुपये मूल्य की अवैध बालू की ढुलाई हो रही है। उनके अनुसार यह पूरा कारोबार प्रशासन और बालू माफिया की कथित मिलीभगत से संचालित हो रहा है, जिससे न केवल सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि नदी के अस्तित्व पर भी संकट गहराता जा रहा है। इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी प्रशासन और राज्य सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ने लगा है।
प्रदीप यादव ने जिला उपायुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी व्यापक स्तर पर अवैध खनन और परिवहन बिना प्रशासन की जानकारी के संभव नहीं है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएंगे। इन आरोपों के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल जरूर बढ़ी है, लेकिन अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
झारखंड में अवैध बालू खनन का मुद्दा पहले भी कई बार सुर्खियों में रहा है, लेकिन इस बार सीधे तौर पर जिला प्रशासन पर आरोप लगने से मामला और अधिक संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
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