झारखंड के धनबाद टाउन हॉल में कृषि पशुपालन एवम सहकारिता विभाग के द्वारा संभावित सूखे की आशंका को देखते हुए । किसानों को जागरूक करने और कृषि संबंधित तकनीक जानकारी देने के उद्देश्य से जिलास्तरीय खरीफ कार्यशाला सह -सुखाड़ आकस्मिकता कार्ययोजना का आयोजन किया गया।साथ बिरसा कृषि हरित क्रांति के तहत आम की भी प्रदर्शनी आयोजित किया गया।आपको बता कि इस कार्यशाला 650 प्रगतिशील कृषक सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने सूखे की स्थिति में खेती को सुरक्षित रखने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

वर्षा जल संरक्षण पर जोर देते हुए किसानों को बताया गया कि खेतों और तालाबों में पानी संरक्षित कर सूखे की स्थिति में सिंचाई कर सकते हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने मछली पालन योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को सूखे की आशंका के अतिरिक्त मत्स्य पालन अपनाने की सलाह दी।डीसी आदित्य रंजन ने कृषकों को पांच एकड़ भूमि पर सामूहिक रूप से खेती सह बागवानी करने पर डीप बोरिंग की व्यवस्था देने का आश्वासन दिया।
कार्यशाला के बाद TV45 से किसानों बात करने के दौरान किसानों ने कहा की – बिज मिलता तो है लेकिन समय पर नहीं मिलता और कभी – कभी धान काटने के बाद हमें बीज दी जाती है । किसानों का कहना है की मंच की बाते जमीन पर उतरना बहुत मुश्किल है । मंच से सिर्फ भाषण देना किसानों के हित का काम नहीं होता।
किसानों और कृषक मित्रों ने कहा कि किसानों के प्रगति,बेहतर फसल को लेकर बैठक में केवल भाषण होता है।जमीनी स्तर पर कोई लाभ किसानों को नही मिलता।किसानों को सिंचाई के लिये सामाग्री,पानी की व्यवस्था, समय पर बीज नही मिलता। फसल नष्ट होने मुवाबजा के लिये विभाग को आवेदन दिया गया वह एक साल से लंबित है।




