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लोहरदगा में ऐतिहासिक रथ यात्रा (Historic Rath Yatra) के आयोजन, धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर लोगों में उत्साह

On: July 15, 2026 4:25 PM
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लोहरदगा में ऐतिहासिक रथ यात्रा (Historic Rath Yatra) के आयोजन, धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर लोगों में उत्साह
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लोहरदगा में ऐतिहासिक रथ यात्रा (Historic Rath Yatra) के आयोजन को लेकर धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई है। अज्ञातवास से भगवान जगन्नाथ के लौटने के बाद बुधवार को श्रीश्री 108 जगन्नाथ महाप्रभु ठाकुरबाड़ी मंदिर में नेत्रदान अनुष्ठान और ऐतिहासिक रथ यात्रा (Historic Rath Yatra) के आयोजन हुआ। जैसे ही भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए मंदिर के पट खुले, बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर  पहुंचे और भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना। मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास से सराबोर रहा। धार्मिक मान्यता के अनुसार महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अज्ञातवास पर चले जाते हैं। उनके वापस लौटने पर नेत्रदान और प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान किया जाता है और ऐतिहासिक रथ यात्रा (Historic Rath Yatra) के आयोजन  किया जाता है।

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इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान जगन्नाथ स्वामी को स्नान कराकर 56 भोग अर्पित किया गया। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

लोहरदगा में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक रथ यात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गुरुवार को शहरी क्षेत्र में भव्य रथ यात्रा निकलेगी। शहर के ठाकुरबाड़ी मंदिर के अलावा तिवारी दूर स्थित जगन्नाथ महाप्रभु मंदिर और तेतरतर स्थित मंदिर से भी रथ यात्रा निकाली जाएगी। लोहरदगा की विशेष पहचान यह है कि यहां एक साथ तीन स्थानों से रथ यात्रा निकलती है और तीनों रथ यात्राओं का समापन मौसी बाड़ी में होता है। ठाकुरबाड़ी मंदिर के महंत राम नरेश शरण ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन आस्था, श्रद्धा और भक्तों के प्रेम का महापर्व है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ होकर अज्ञातवास में चले जाते हैं।

नेत्रदान और प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के बाद भगवान अपने भक्तों को पुनः दर्शन देते हैं। 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर अपने मौसी के घर जाएंगे, जहां नौ दिनों तक विराजमान रहेंगे। इसके बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ्य होकर अपने धाम वापस लौटेंगे। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान का रथ खींचना और दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने रथ पर सवार होकर स्वयं भक्तों के बीच आते हैं और सभी को समान रूप से अपने दर्शन का अवसर प्रदान करते हैं। वहीं श्रीराम जानकी तपोवन मंदिर, रांची के महंत ओम प्रकाश शरण ने बताया कि मंदिर में पूजा सुबह सात बजे से शुरू होगी।

शाम साढ़े चार बजे भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा ठाकुरबाड़ी मंदिर प्रांगण से रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हुए महावीर चौक स्थित मौसीबाड़ी पहुंचेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की। धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराने में ठाकुरबाड़ी मंदिर के महंत राम नरेश शरण, श्रीराम जानकी तपोवन मंदिर रांची के महंत ओमप्रकाश शरण, रमेश देव पौराणिक, मोहन दास, अयोध्या दास, मनोज दास, विष्णु देव सहित अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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