खेती से चल रही है किसानों की अजीवका (Livelihood) और अब इनकी आजिवका (Livelihood) भी बारिश के नहीं होने कारण पर संकट के साय में है। देवघर जिला के सारठ प्रखंड में मानसून की बेरुखी से किसान परेशान हैं, मानसून (monsoon) के दिनों में पिछले 15 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण धान के बिचड़े सूखने के कगार पर हैं। इससे मानसून (monsoon) में भी अकाल की आशंका बढ़ गई है और किसानों की आजीविका (Livelihood)पर संकट मंडरा रहा है। बिचड़ों और फसलों को बचाने के लिए कुछ किसान डीजल पंप सेट के सहारे सिंचाई कर धान की रोपनी करने में जुटे हैं। हालांकि, यह वैकल्पिक व्यवस्था किसानों के लिए बेहद महंगी साबित हो रही है।

और ऐसे बोरवेल या मोटर का सहरा लेना चाहे तो डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण किसान कृत्रिम सिंचाई का सहरा नहीं ले पा रहे है, जिससे खेती अब सुखने के कगार पर आ गई है । किसानें का कहना है कि उनके लिए खेती करना अब गले की फंदा बनी हुई है, सारठ प्रखंड में किसानों की खेती पूरी तरह से मानसून पर निर्भर है। कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सारठ प्रखंड के 80 से 90 फीसदी किसान खेती पर निर्भर है। सारठ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन पिछले तीन साल से समय पर समुचित बारिश नहीं होने से धान का कटोरा खाली रह जा रहा है।
जिससे किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। किसानों ने इस वर्ष अत्यधिक कीमत में हाइब्रिड बीज खरीदा है बिचड़ा खेत में तैयार है। लेकिन बारिश नहीं होने से अभी खेत में रोपाई की बात तो दूर जुताई भी शुरु नहीं हुई है। जबकि हाइब्रिड बीज के रोपने का समय निर्धारित है। किसानों ने बताया कि आद्रा नक्षत्र से ही खेत की रोपाई शुरु हो जाती है। लेकिन आद्रा नक्षत्र खत्म हो गया तथा पुनर्वसु नक्षत्र शुरु हो गया है जबकि रोपनी की बात तो दूर खेत जुताई भी नहीं हुई है।





