रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी झारखंड के छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। आंदोलन के 13वें दिन छात्रों ने सरकार के साथ संभावित वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल की घोषणा कर दी है। हालांकि बातचीत शुरू होने से पहले ही एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आ गया है। सरकार जहां बंद कमरे में वार्ता करना चाहती है, वहीं छात्र खुले और पारदर्शी तरीके से बातचीत कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।

छात्रों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है, इसलिए सरकार के साथ होने वाली वार्ता भी पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। उनका मानना है कि खुले संवाद से किसी भी प्रकार की गलतफहमी या विवाद की संभावना कम होगी और जनता भी पूरी प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रख सकेगी।
शुरुआत में इस आंदोलन को सीमित समर्थन मिलता दिखाई दिया था, लेकिन समय के साथ इसकी गूंज लगातार बढ़ती गई। अब 13वें दिन यह आंदोलन न केवल झारखंड बल्कि देशभर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। लगातार बढ़ते जनसमर्थन और सरकार पर बन रहे दबाव ने इस आंदोलन को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार करते हुए खुले मंच पर वार्ता के लिए तैयार होती है या फिर बातचीत के स्वरूप को लेकर गतिरोध और लंबा खिंचता है।
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वार्ता में केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगों, तथ्यों और पक्ष को सरकार के सामने रखेंगे। पत्रकार और कानूनविद केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में उपस्थित रहेंगे तथा किसी भी प्रकार की चर्चा, बयान या मांग प्रस्तुत नहीं करेंगे।
घोषित छात्र प्रतिनिधिमंडल में रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, अंकित कुमार और शालू सिंह को शामिल किया गया है।
पत्रकार प्रतिनिधि (अभिभावक के रूप में) शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा रहेंगे, जबकि कानूनविद (अभिभावक के रूप में) अजीत कुमार प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद रहेंगे।
प्रतिनिधिमंडल की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार बैठक के दौरान सभी विषयों और मांगों को केवल छात्र प्रतिनिधि ही प्रस्तुत करेंगे। पत्रकार एवं कानूनविद किसी भी प्रकार की बातचीत में भाग नहीं लेंगे। साथ ही मीडिया से जुड़े अभिभावकों को वार्ता स्थल के अंदर माइक, कैमरा, रिकॉर्डिंग डिवाइस या किसी भी प्रकार का साउंड सिस्टम ले जाने की अनुमति नहीं होगी। पूरी वार्ता छात्र प्रतिनिधियों के नेतृत्व में शांतिपूर्ण, अनुशासित और व्यवस्थित ढंग से संचालित की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार छात्रों की पारदर्शी वार्ता की मांग स्वीकार करेगी या फिर बातचीत की प्रक्रिया को लेकर बना गतिरोध आंदोलन को और लंबा खींच देगा। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली वार्ता इस आंदोलन की दिशा और भविष्य तय कर सकती है।
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