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CID पूछताछ से पहले JPSC के तीनों सदस्यों का एक साथ इस्तीफा, राज्यपाल संतोष गंगवार ने स्वीकार किया

CID पूछताछ से पहले JPSC के तीनों सदस्यों का एक साथ इस्तीफा, राज्यपाल संतोष गंगवार ने स्वीकार किया
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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में रविवार को बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। आयोग के तीन सदस्यों डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तीनों सदस्यों ने अपना त्यागपत्र राज्यपाल को भेजा था, जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार की अनुशंसा के बाद स्वीकार कर लिया है।

बताया जा रहा है कि तीनों सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने में करीब एक महीने का ही समय बचा था। ऐसे समय में एक साथ तीन सदस्यों के इस्तीफे को JPSC के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आयोग में सदस्यों की भूमिका नियुक्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण होती है।

CID की पूछताछ से पहले इस्तीफा

JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CID की जांच चल रही है। इसी जांच के बीच तीनों सदस्यों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। उन्हें सोमवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इसी बीच तीनों सदस्यों के इस्तीफे से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

JPSC में परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच पहले से ही चल रही है। जुलाई में CID और रांची पुलिस की टीम ने आयोग के कार्यालय में छापेमारी भी की थी। इससे पहले आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया था।

छात्र आंदोलन के बीच बढ़ी हलचल

JPSC और JSSC में कथित भ्रष्टाचार, परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है। अभ्यर्थी लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

इसी आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों के एक साथ इस्तीफे से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित गड़बड़ियों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।

सरकार और छात्रों के बीच हुई थी बातचीत

इससे पहले आंदोलनरत JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात की थी। बैठक के बाद मंत्री ने कहा था कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं को अलग-अलग पहलुओं से देखा जाएगा।

सरकार के मुताबिक, आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी, जबकि वित्तीय प्रभाव और कथित अवैध वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों को लेकर ED से जांच का अनुरोध किया जाएगा।

सरकार ने 90 दिनों में चार्जशीट का दावा किया

सरकार की ओर से यह भी कहा गया था कि जांच के बाद फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा और आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का प्रयास किया जाएगा।

इसके साथ ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों की समिति गठित करने की बात कही गई थी, ताकि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में जरूरी सुधार किए जा सकें।

CGL परीक्षा को लेकर भी विवाद

छात्र प्रतिनिधियों ने CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग भी उठाई थी। सरकार की ओर से कहा गया कि जिस परीक्षा का आयोजन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हुआ है, उसे सरकार अपने स्तर से रद्द नहीं कर सकती।

सरकार ने CID जांच की निगरानी के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव भी रखा था। हालांकि, छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखा।

अब आगे क्या?

JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे के बाद अब सबकी नजर CID की जांच पर है। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी किन बिंदुओं पर पूछताछ आगे बढ़ाती है और कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं।

तीन सदस्यों के इस्तीफे और इससे पहले JPSC अध्यक्ष के पद छोड़ने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली तथा आगामी भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं अभ्यर्थी लगातार पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।

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