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जमशेदपुर में खनन कानून को लेकर JMM का केंद्र के खिलाफ मोर्चा, 14,656 करोड़ के नुकसान का दावा

जमशेदपुर में खनन कानून को लेकर JMM का केंद्र के खिलाफ मोर्चा, 14,656 करोड़ के नुकसान का दावा
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जमशेदपुर में खनन-खनिज अधिनियम 2026 को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंकने की चेतावनी दी है। पार्टी ने नए कानून को झारखंड के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि इससे राज्य के राजस्व और जनकल्याणकारी योजनाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, JMM ने इस मुद्दे पर बड़े आंदोलन की तैयारी के संकेत दिए हैं।

सर्किट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में JMM के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने केंद्र सरकार के नए खनन-खनिज कानून पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने दावा किया कि कानून में किए गए बदलावों से झारखंड को करीब 14,656 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। हालांकि, झारखंड के 2026-27 के बजट विश्लेषण में 14,656 करोड़ रुपये की राशि खनिजयुक्त भूमि पर उपकर से अनुमानित राजस्व के रूप में दर्ज है।

JMM का आरोप है कि खनन से जुड़े राजस्व में कमी का सीधा असर राज्य की विकास योजनाओं और आम लोगों को मिलने वाली कल्याणकारी सुविधाओं पर पड़ सकता है। पार्टी ने विशेष रूप से मंईयां सम्मान योजना और बुजुर्गों की पेंशन जैसी योजनाओं पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। राज्य के बजट दस्तावेज के अनुसार, 2026-27 में मंईयां सम्मान योजना के लिए 14,066 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

कुणाल षाड़ंगी ने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि खनिज संपदा से होने वाले राजस्व पर राज्य का अधिकार और हित सुरक्षित रहना चाहिए। JMM के मुताबिक, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर प्रस्तावित कानून पर राज्य की आपत्ति दर्ज कराई है।

पार्टी ने इस मामले में राष्ट्रपति से भी हस्तक्षेप करने और झारखंड के हितों की रक्षा करने की मांग की है। JMM का कहना है कि यदि केंद्र सरकार उसकी मांगों पर विचार नहीं करती है, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

JMM ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर पार्टी सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करेगी। पार्टी की ओर से यहां तक कहा गया है कि झारखंड के हितों की अनदेखी की गई तो राज्य से खनिज बाहर जाने को रोकने के लिए भी आंदोलन किया जाएगा। इससे केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और राज्य सरकार के खनन विभाग के अनुसार यहां देश के कुल खनिज संसाधनों का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। ऐसे में खनन से जुड़े कानून और राजस्व का मुद्दा राज्य की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।

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