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अंधविश्वास बना मासूम के लिए काल का कारण, समय पर इलाज न मिलने गई मासूम की जान

On: August 30, 2026 1:44 PM
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अंध विश्वास (Superstition) बना मासूम के लिए काल का कारण, समय पर इलाज न मिलने से गई मासूम की जान
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गुमला जिले के पालकोट पुलिस स्टेशन इलाके में आने वाले अलंकरा के मातिम टोली डोंगा डहर गांव से एक दुखद मामला सामने आया है, जहां अंधविश्वास (Superstition) और समय पर इलाज न मिलने की वजह से दो मासूम भाइयों की मौत हो गई। दोनों बच्चे लगभग आठ दिनों से बीमार थे। उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय, अंधविश्वास (Superstition) फेरे में पड़  कर परिवार ने घर पर ही उनका इलाज किया और झाड़-फूंक का सहारा लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रांसिस उरांव के दो बेटे सचिन उरांव और अनूप उरांव कई दिनों से बीमार थे। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार स्थिति को पूरी तरह समझ पाता, उससे पहले ही दोनों बच्चों की मौत हो गई। बताया गया कि सचिन उरांव की मौत हो गई, जबकि उसके छोटे भाई अनूप उरांव की मौत  हो गई । दोनों बच्चों की मौत से परिवार गहरे सदमे में है और पूरे गाँव में मातम पसरा है। गांव वालों के अनुसार, दोनों बच्चे लगभग आठ दिनों से बीमार थे। इसके बावजूद, उन्हें समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया। परिवार को उम्मीद थी किअंधविश्वास (Superstition)  के पारंपरिक इलाज और झाड़-फूँक से वे ठीक हो जाएंगे। हालांकि,अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।

इस घटना ने अंधविश्वास, समय पर इलाज न मिलने और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव वालों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग की।  इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर बनाने की मांग की है। गांव वालों का कहना है कि लोगों को बीमारी की स्थिति में झाड़-फूंक का सहारा लेने के बजाय तुरंत इलाज कराने के महत्व के बारे में जागरूक करने की ज़रूरत है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से माँग की है कि वे गाँवों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाएँ, समय पर इलाज मुहैया कराएं और अंधविश्वास से निपटने के प्रयासों को बढ़ावा दें। बच्चों की मौत का सही मेडिकल कारण संबंधित स्वास्थ्य और प्रशासनिक जाँच के बाद ही आधिकारिक तौर पर स्पष्ट हो पाएगा।

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