धनबाद ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में बेहतर प्रदर्शन करते हुए देशभर में 18वां स्थान हासिल किया है। पिछले वर्ष के मुकाबले धनबाद ने 11 पायदान की छलांग लगाई है। वहीं, 10 लाख से अधिक आबादी वाले झारखंड के शहरों की श्रेणी में धनबाद ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के बाद प्रशासन ने कोयलांचल की वायु गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में नई रणनीति तैयार की है।
बुधवार को धनबाद के न्यू टाउन हॉल में स्वच्छ वायु दिवस-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, वैज्ञानिक संस्थानों और खनन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान शहर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा के साथ प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में कोयला ढुलाई वाले मार्गों और माइनिंग क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के लिए वाटर स्प्रिंकलर और फॉग कैनन का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। कोयला लदे ट्रकों और ट्रॉलियों को पूरी तरह तिरपाल से ढकना अनिवार्य करने पर भी जोर दिया गया, ताकि परिवहन के दौरान धूल और कोयले के कण हवा में न फैलें।
नगर निगम क्षेत्र की प्रमुख सड़कों की नियमित सफाई के लिए मैकेनिकल स्वीपर का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। वहीं, सड़कों के किनारे मौजूद कच्ची मिट्टी को पक्का करने और बीसीसीएल के ओवरबर्डन (ओबी) डंप क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने के निर्देश दिए गए हैं।
शहर के प्रवेश द्वारों और औद्योगिक इलाकों के आसपास ग्रीन बफर जोन विकसित करने की भी रणनीति बनाई गई है। इसके अलावा प्रदूषण हॉटस्पॉट की निगरानी के लिए रीयल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़ाने और खुले में कचरा जलाने पर भारी जुर्माना लगाने की नीति पर भी सहमति बनी।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के दौरान धनबाद के भूली स्थित वार्ड संख्या 15 को सबसे स्वच्छ वार्ड चुना गया। अधिकारियों ने भूली मॉडल की सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था को शहर के दूसरे वार्डों में भी लागू करने की योजना बनाई है।

कार्यक्रम में धनबाद नगर आयुक्त आशीष गंगवार, एसएसपी प्रभात कुमार, एसपी सिटी, ग्रामीण एसपी, एसडीएम, एसडीओ, डीएफओ, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर के निदेशक और बीसीसीएल के जीएम समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में सड़कों के आसपास लगातार पौधारोपण किया जा रहा है और लगाए गए पौधों की निगरानी भी की जा रही है। जो पौधे सूख जाते हैं, उन्हें दोबारा लगाया जा रहा है।
प्रशासन का फोकस अब धनबाद की मौजूदा उपलब्धि को बरकरार रखने के साथ वायु गुणवत्ता में और सुधार लाने पर है। इसके लिए खनन क्षेत्रों से लेकर शहर की सड़कों और कचरा प्रबंधन तक, प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर नियंत्रण की रणनीति को जमीन पर उतारने की तैयारी है।




