देशभर में आज विश्वकर्मा पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प, वास्तुकला और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है। खासतौर पर कारखानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, वर्कशॉप, दुकानों, निर्माण स्थलों और तकनीकी संस्थानों में विश्वकर्मा पूजा को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है।
विश्वकर्मा पूजा के मौके पर छोटी-बड़ी गाड़ियों, मशीनों, औजारों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की साफ-सफाई कर उन्हें सजाया गया। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर कर्मचारियों और कारोबारियों ने सुख-समृद्धि, सुरक्षित कार्य और कारोबार में तरक्की की कामना की। कई जगहों पर पूजा के बाद प्रसाद वितरण और भंडारे का भी आयोजन किया गया।
औद्योगिक क्षेत्रों में दिख रहा है खास उत्साह
विश्वकर्मा पूजा को लेकर औद्योगिक क्षेत्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। फैक्ट्रियों और वर्कशॉप में सुबह से ही पूजा की तैयारियां शुरू हो गईं। मशीनों और उपकरणों को फूल-मालाओं से सजाया गया। कर्मचारियों और श्रमिकों ने एक साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की। कई प्रतिष्ठानों में पूजा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रसाद वितरण भी किया गया।
श्रमिकों और कारीगरों के लिए है बेहद खास दिन
भगवान विश्वकर्मा को शिल्पकारों, कारीगरों, इंजीनियरों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों का आराध्य माना जाता है। ऐसे में यह पर्व मेहनतकश वर्ग के लिए विशेष महत्व रखता है। लोहार, बढ़ई, मैकेनिक, इंजीनियर, मशीन ऑपरेटर और विभिन्न तकनीकी कार्यों से जुड़े लोग इस दिन अपने औजारों और उपकरणों की पूजा करते हैं।
घरों और दुकानों में भी पूजा-अर्चना
विश्वकर्मा पूजा का उत्साह सिर्फ औद्योगिक संस्थानों तक सीमित नहीं है। कई घरों, दुकानों और छोटे कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में भी भगवान विश्वकर्मा की पूजा की गई। लोगों ने अपने कामकाज में इस्तेमाल होने वाले औजारों और उपकरणों को साफ कर उनकी पूजा की और बेहतर कामकाज तथा समृद्धि की प्रार्थना की।
देशभर में उत्सव का माहौल
बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत देश के ज्यादातर हिस्सों में विश्वकर्मा पूजा को लेकर उत्सव का माहौल है। जगह-जगह भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। पूजा पंडालों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है और शाम के समय श्रद्धालुओं की भीड़ भी देखने को मिल रही है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह पर्व श्रम, हुनर और तकनीकी विकास के महत्व को भी रेखांकित करता है।






