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जामताड़ा के बड़जोड़ा में करम महोत्सव की धूम, आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के रंग में रंगा पूरा इलाका

जामताड़ा के बड़जोड़ा में करम महोत्सव की धूम, आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के रंग में रंगा पूरा इलाका
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झारखंड के राजकीय पर्व करम के अवसर पर बड़जोड़ा में आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। बिरसा बिनोद करम अखड़ा के बैनर तले बिनोद बिहारी महतो चौक स्थित मैदान में भव्य करम महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के करीब 30 गांवों से हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। करम गीतों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोक नृत्य की गूंज से पूरा मैदान उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। महोत्सव में ग्रामीणों की भारी भागीदारी ने करम पर्व के प्रति लोगों की आस्था और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव को भी प्रदर्शित किया।

कार्यक्रम में अलग-अलग गांवों से पहुंची कुल 21 करम अखड़ा टीमों ने पारंपरिक करम नृत्य और गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। पारंपरिक परिधानों में सजे महिला-पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी कार्यक्रम का हिस्सा बने। करम गीतों की धुन और मांदर समेत अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर लोग देर तक झूमते नजर आए। अखड़ा टीमों की प्रस्तुतियों ने महोत्सव में मौजूद लोगों का खूब मनोरंजन किया और झारखंड की समृद्ध लोक परंपरा की जीवंत तस्वीर पेश की।

करम महोत्सव के दौरान विभिन्न गांवों से आए लोगों ने सामूहिक रूप से नृत्य और गायन में हिस्सा लिया। आयोजन स्थल पर उत्सव का माहौल इस कदर बना रहा कि हर उम्र के लोग पारंपरिक संस्कृति के रंग में रंगे दिखाई दिए। आयोजकों का कहना है कि करम महोत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का भी माध्यम है। सामूहिक रूप से पर्व मनाने से ग्रामीणों के बीच सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा मिलता है।

आयोजकों ने बताया कि करम पर्व भाई-बहन के प्रेम, सुख-समृद्धि, खुशहाली और प्रकृति संरक्षण की परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी समाज में इस पर्व का विशेष सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। करम डाली की पूजा और पारंपरिक गीत-नृत्य के माध्यम से प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक मूल्यों को अभिव्यक्त किया जाता है। बड़जोड़ा में आयोजित इस महोत्सव ने भी इन्हीं परंपराओं को केंद्र में रखा।

महोत्सव के आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य झारखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति और विरासत को संरक्षित करना है, ताकि आधुनिक दौर में भी नई पीढ़ी अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ी रहे। 30 गांवों की भागीदारी और 21 अखड़ा टीमों की प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को खास बना दिया। हजारों लोगों की मौजूदगी में आयोजित करम महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोक संस्कृति आज भी ग्रामीण समाज के जीवन और सामूहिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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