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रामविलास पासवान जयंती: 5 दशक तक दलित राजनीति की मज़बूत आवाज़

On: July 5, 2025 7:58 PM
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रामविलास पासवान
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भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेता और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक रामविलास पासवान की आज जयंती है। उनका जन्म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले के शहरबन्नी गांव में एक दलित परिवार में हुआ था। दशकों तक उन्होंने दलितों, पिछड़ों और सामाजिक न्याय की आवाज को एक मजबूत मंच दिया।

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शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

रामविलास पासवान ने कोसी कॉलेज और पटना विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। वे लॉ ग्रेजुएट भी थे। साल 1969 में उनका चयन बिहार पुलिस सेवा में डीएसपी के पद पर हुआ, लेकिन समाज की सेवा करने की चाह ने उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने के लिए प्रेरित किया।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से राजनीति में प्रवेश किया और उसी साल अलौली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।

1977 में वे जनता पार्टी के टिकट पर हाजीपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। उन्होंने 4.25 लाख वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। 1989 में उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा।

लोजपा की स्थापना और संघर्ष

2000 में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की स्थापना की, जो जल्द ही दलितों और पिछड़े वर्गों की एक मजबूत आवाज बन गई। वे नौ बार लोकसभा सांसद और दो बार राज्यसभा सांसद रहे। उन्होंने छह प्रधानमंत्रियों के साथ केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया।

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“मौसम वैज्ञानिक” की उपाधि

रामविलास पासवान को राजनीति में “मौसम वैज्ञानिक” कहा जाता था, क्योंकि वे बदलते राजनीतिक समीकरणों को बारीकी से समझते थे और सही समय पर सही गठबंधन चुनते थे।

निजी जीवन

उनका निजी जीवन भी काफी चर्चा में रहा। उन्होंने 1960 में राजकुमारी देवी से शादी की, जिनसे बाद में उनका तलाक हो गया। फिर 1983 में उन्होंने रीना शर्मा से शादी की। उनके बेटे चिराग पासवान आज उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

मृत्यु और विरासत

रामविलास पासवान का लंबी बीमारी के बाद 8 अक्टूबर 2020 को निधन हो गया। वे पांच दशकों तक भारतीय राजनीति के एक मजबूत स्तंभ रहे और जीवन भर दलितों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे।

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