हर वर्ष की तरह इस बार भी देवघाट और सीता कुंड पर प्रतिदिन फल्गु नदी की महाआरती का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, विष्णुपद मंदिर परिसर में रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या, प्रवचन और भागवत कथा का आयोजन होगा, जो श्रद्धालुओं की आस्था को और गहराई देगा।

पिछले वर्ष करीब 22 लाख तीर्थयात्री गया पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करते हुए पिंडदान किया था। इस बार भी देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु अपने पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करने पहुंचे हैं।
Also Read: Latehar News: लातेहार में मौत के साये में जीने को मजबूर लोग, जानिए कैसे
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महावीर मंदिर ट्रस्ट, पटना ने रहने और भोजन की व्यवस्था संभाली है। विशेष रूप से, विष्णुपद मंदिर के पास ‘विष्णु रसोई’ की शुरुआत की गई है, जहां प्रतिदिन दो समय का निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहल अयोध्या की ‘राम रसोई’ की तर्ज पर की गई है।
गया का पितृपक्ष मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को जीवित रखता है, जहां पितरों के प्रति श्रद्धा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है।





