आज वंदे मातरम् गीत को 150 वर्ष पूरे हो गए। यह गीत भारत के राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक बन चुका है और भारतीय जनमानस में देशभक्ति की भावना जगाने वाला अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है।

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत सबसे पहले उनके उपन्यास “आनंदमठ” (1882) में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों और जनता के बीच लोकप्रिय हुआ। आज भी यह गीत भारतीय विद्यार्थियों, सरकारी कार्यक्रमों और राष्ट्रीय अवसरों पर गाया जाता है।
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समारोहों और कार्यक्रमों में लोग इस गीत के माध्यम से देशभक्ति और एकता की भावना को साझा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के संघर्ष और स्वतंत्रता की कहानी का प्रतीक है।





