नई दिल्ली: दिल्ली लाल किला धमाके (Delhi Blast) की जांच को लेकर आज केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को एक उच्च-स्तरीय आपातकालीन बैठक की। इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह लिया गया कि अब इस आतंकी हमले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी शामिल किया जाएगा।

सरकार का पूरा फोकस अब सिर्फ साजिशकर्ताओं को पकड़ना नहीं, बल्कि इस आतंकी मॉड्यूल के वित्तीय नेटवर्क (Financial Network) को जड़ से उखाड़ फेंकना है।
Delhi Blast: शाह की बैठक में ‘मनी ट्रेल’ पर फोकस
गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के डीजी, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के प्रमुख, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, गृह सचिव और विशेष रूप से प्रवर्तन निदेशालय (ED) के डायरेक्टर भी मौजूद थे।सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य एजेंडा आतंकी मॉड्यूल की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच को तेज करना था। गृह मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस हमले में शामिल वित्तीय तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए।
Delhi Blast: ED खंगालेगी ‘मनी ट्रेल’, यूनिवर्सिटी रडार पर
बैठक के बाद जांच का दायरा तुरंत बढ़ा दिया गया है। ED को इस आतंकी मॉड्यूल के “मनी ट्रेल” (पैसे के लेन-देन) की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है।ED की भूमिका: एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि इस हमले को अंजाम देने के लिए फंडिंग कहाँ से आई? पैसा किन-किन खातों से होकर गुजरा? और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संबंध क्या थे? अल फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा: इस जांच के केंद्र में फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी भी आ गई है। सरकार ने यूनिवर्सिटी पर बड़ा एक्शन लेते हुए उसके सभी रिकॉर्ड्स का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया है।
वित्तीय जाँच: ED और अन्य वित्तीय जांच एजेंसियां अब यूनिवर्सिटी को मिलने वाले धन के स्रोतों और किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितताओं की गहन जांच करेंगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल किसी भी तरह से आतंकी फंडिंग के लिए किया गया था।
संक्षेप में, अमित शाह की आज की बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस धमाके को एक अकेली घटना के तौर पर नहीं देख रही है। जांच का मकसद अब सिर्फ बम रखने वालों को पकड़ना नहीं, बल्कि उन्हें पैसा, संसाधन और पनाह मुहैया कराने वाले पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना है।
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