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Bihar Chunav 2025: तेज प्रताप यादव और BJP सांसद रवि किशन की ‘महादेव’ मुलाकात

On: November 9, 2025 12:49 PM
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तेज प्रताप यादव और BJP सांसद रवि किशन की 'महादेव' मुलाकात
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Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच, जनशक्ति जनता दल (JJD) के संस्थापक तेज प्रताप यादव और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद रवि किशन के बीच शुक्रवार को पटना एयरपोर्ट पर हुई एक ‘सौजन्य’ मुलाकात ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। दोनों नेताओं की इस ‘अचानक’ हुई बैठक के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

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Bihar Chunav: पटना एयरपोर्ट पर ‘अचानक’ हुई मुलाकात

जानकारी के मुताबिक, दोनों नेता अपने-अपने चुनाव प्रचार अभियान से लौट रहे थे। तेज प्रताप यादव गया से प्रचार कर लौट रहे थे, जबकि गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में रैलियों को संबोधित करने के बाद लौट रहे थे। एयरपोर्ट से बाहर निकलते वक्त दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से गर्मजोशी से बात की।

“बेरोजगारी हटाने वाले के साथ”: तेज प्रताप का गोलमोल जवाब

पत्रकारों से बात करते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि यह उनकी रवि किशन से पहली मुलाकात थी। उन्होंने कहा, “जाहिर है, जब भगवान शिव (भोलेनाथ) की भक्ति की बात आती है तो हम दोनों एक ही पृष्ठ पर हैं।”जब उनसे बीजेपी के साथ जाने की संभावना पर सवाल किया गया, तो तेज प्रताप ने एक सधा हुआ और गोलमोल जवाब दिया। उन्होंने कहा, “जो भी बेरोजगारी हटाएगा, मैं उसके साथ रहूंगा।”

रवि किशन बोले- “भोलेनाथ के भक्तों के लिए दरवाजे खुले हैं”

वहीं, अभिनेता से नेता बने रवि किशन ने भी तेज प्रताप की तारीफ की और उन्हें “दिल वाले इंसान” बताया। उन्होंने अटकलों को और हवा देते हुए कहा, “कुछ भी हो सकता है। बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन सभी भोलेनाथ के भक्तों के लिए दरवाजे खुले रखते हैं, जो निःस्वार्थ सेवा के लिए समर्पित हैं।”हालांकि, उन्होंने तेज प्रताप के RJD से निष्कासन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और इसे उनका निजी मामला बताया।

JJD बनाम RJD: क्या नए समीकरण बन रहे हैं?

यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि अपने पिता लालू प्रसाद यादव द्वारा RJD से निष्कासित किए जाने के बाद तेज प्रताप अपनी नई पार्टी (JJD) के साथ स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। वह ऐतिहासिक रूप से बीजेपी और उसके सहयोगियों के मुखर आलोचक रहे हैं। इस सौहार्दपूर्ण मुलाकात और अस्पष्ट बयानों ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या चुनाव के बीच कोई नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है।

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