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दिलीप जायसवाल बने मंत्री, अब कौन संभालेगा बीजेपी की कमान? रेस में ये 4 बड़े नाम

On: November 24, 2025 12:41 PM
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दिलीप जायसवाल बने मंत्री, अब कौन संभालेगा बीजेपी की कमान? रेस में ये 4 बड़े नाम
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Bihar News: बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के मंत्री बनते ही संगठन में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की परंपरा को देखते हुए माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही बिहार को नया प्रदेश अध्यक्ष दे सकती है। हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव लंबित होने के कारण इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चार प्रमुख नामों की चर्चा जोरों पर है।

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ये नाम जातिगत समीकरणों और मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी के आधार पर आगे चल रहे हैं:

1. नीतीश मिश्रा (ब्राह्मण चेहरा): मिथिला की जीत का इनाम?

पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे और झंझारपुर से 5वीं बार विधायक बने नीतीश मिश्रा का नाम रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है। पिछली एनडीए सरकार में उद्योग मंत्री रहे नीतीश मिश्रा को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है।

  • दावा: मिथिला क्षेत्र की 37 में से 31 सीटों पर एनडीए की जीत के बावजूद मंत्रिमंडल में उनकी अनुपस्थिति को लोग संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने का संकेत मान रहे हैं। चूंकि दिलीप जायसवाल (जिन्हें उद्योग विभाग मिला है) अब मंत्री हैं, ऐसे में ब्राह्मण कोटे से नीतीश मिश्रा को संगठन की कमान सौंपी जा सकती है।

2. जनक राम (दलित कार्ड): अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार

नीतीश कैबिनेट में भाजपा कोटे से केवल एक दलित मंत्री (लखेंद्र रौशन) बनाए जाने के बाद जनक राम का दावा मजबूत हुआ है। पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री जनक राम को इस बार मंत्रिमंडल से ड्रॉप किया गया है।

  • दावा: 2013 में बसपा छोड़ भाजपा में आए जनक राम पीएम मोदी से प्रभावित रहे हैं। चर्चा है कि पार्टी दलित समाज को साधने के लिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंप सकती है।

3. संजीव चौरसिया (OBC): संघ परिवार की पृष्ठभूमि

पटना की दीघा सीट से लगातार तीसरी बार विधायक बने संजीव चौरसिया का नाम भी चर्चा में है। उनके पिता गंगा प्रसाद जनसंघ के समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं और मेघालय-सिक्किम के राज्यपाल भी रह चुके हैं।

  • दावा: संजीव चौरसिया का नाम मंत्री पद के लिए भी चल रहा था, लेकिन वहां नंबर नहीं लगा। ऐसे में उनकी मजबूत संघ पृष्ठभूमि और ओबीसी समीकरण को देखते हुए संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

4. विवेक ठाकुर (भूमिहार): जातिगत समीकरण साधने की कोशिश

नवादा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर का नाम भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल है।

  • दावा: एनडीए के 202 विधायकों में 22 भूमिहार जाति से हैं, लेकिन मंत्रिमंडल में इस समाज को अपेक्षित हिस्सेदारी (सिर्फ 2 मंत्री) नहीं मिली है। राजपूत समाज (32 विधायक) को 4 मंत्री पद मिले हैं। ऐसे में भूमिहार समाज की नाराजगी दूर करने और संतुलन बनाने के लिए पार्टी विवेक ठाकुर पर दांव खेल सकती है।

कब होगा फैसला?

फिलहाल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल भी विस्तार पर चल रहा है। जानकारों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद ही बिहार में औपचारिक रूप से नए अध्यक्ष की घोषणा होने की संभावना है, लेकिन सियासी बिसात पर मोहरे अभी से सेट किए जाने लगे हैं।

यह भी पढ़े: 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे नीतीश कुमार

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