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Patna News: मैं ही निशांत को राजनीति में लेकर आया-जेडीयू विधायक गोपाल मंडल

On: September 23, 2025 6:55 PM
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मैं ही निशांत को राजनीति में लेकर आया-जेडीयू विधायक गोपाल मंडल
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Patna News: बिहार की राजनीति अक्सर बयानबाजी और व्यक्तिगत दावों से घिरी रहती है। इसी कड़ी में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ विधायक गोपाल मंडल ने एक बड़ा बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया कि निशांत को राजनीति में लाने के पीछे उनकी ही भूमिका थी। यह बयान न केवल व्यक्तिगत राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि जेडीयू की आंतरिक गतिशीलता पर भी सवाल उठाता है।

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गोपाल मंडल का बयान

गोपाल मंडल ने मीडिया से बातचीत में साफ-साफ कहा, “निशांत को राजनीति में मैं ही लेकर आया था, आज अगर वह इस मुकाम पर हैं तो उसकी नींव मैंने रखी थी।” उनका यह दावा कई लोगों को चौंका देने वाला लगा, क्योंकि निशांत को जदयू में एक उभरते हुए चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।

निशांत कौन हैं?

निशांत जदयू के युवा और सक्रिय नेताओं में से एक माने जाते हैं। वह पार्टी के कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय रहते हैं और जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियों के कारण उन्हें भविष्य का चेहरा माना जा रहा है।

क्या यह सत्ता की साझेदारी का संकेत?

गोपाल मंडल का यह दावा सिर्फ़ अपने निजी प्रभाव का प्रदर्शन नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह बयान पार्टी में अपना प्रभाव बनाए रखने और भविष्य में अपनी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने की एक रणनीति भी हो सकती है। जेडीयू जैसी पार्टी में, जहां वरिष्ठ नेताओं का अनुभव महत्वपूर्ण है, ऐसे दावे नेतृत्व पर दबाव बनाने का प्रयास भी हो सकते हैं।

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आंतरिक तनाव का संकेत

इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं: क्या जेडीयू में नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है? क्या वरिष्ठ नेताओं को लग रहा है कि अचानक नई पीढ़ी के नेताओं को बढ़ावा मिल रहा है? गोपाल मंडल जैसे नेताओं का यह बयान इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर छिपा असंतोष पनप रहा है। गोपाल मंडल द्वारा किया गया यह दावा सिर्फ एक व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि यह जेडीयू की अंदरूनी राजनीति की गहराई को उजागर करता है। अगर पार्टी नेतृत्व ऐसे बयानों को गंभीरता से नहीं लेता है, तो भविष्य में पार्टी के लिए ये चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। साथ ही, यह भी साफ़ है कि बिहार की राजनीति में नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखना और भी ज़रूरी हो गया है।

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