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हार का ठीकरा संजय यादव पर फूटा, राबड़ी आवास के बाहर RJD कार्यकर्ताओं का हंगामा

On: November 18, 2025 10:13 AM
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हार का ठीकरा संजय यादव पर फूटा, राबड़ी आवास के बाहर RJD कार्यकर्ताओं का हंगामा
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Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की करारी हार के बाद पार्टी की अंदरूनी लड़ाई अब सड़कों पर आ गई है। सोमवार को RJD विधायक दल की मीटिंग के बाद लालू प्रसाद यादव के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने तेजस्वी यादव के सलाहकार और राज्यसभा MP संजय यादव पर अपना गुस्सा निकाला। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने पटना स्थित राबड़ी देवी के आवास के बाहर इकट्ठा होकर संजय यादव के खिलाफ जमकर हंगामा किया और नारेबाजी की। कार्यकर्ता पार्टी की इस “शर्मनाक हार” और “दुर्गति” के लिए सीधे तौर पर संजय यादव को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

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Sanjay Yadav News: रोहिणी-तेजस्वी विवाद की जड़ भी संजय

यह हंगामा उस पारिवारिक विवाद के ठीक दो दिन बाद हुआ है, जब राबड़ी आवास पर ही लालू की बेटी रोहिणी आचार्या और बेटे तेजस्वी यादव के बीच संजय यादव को लेकर तीखी झड़प हुई थी। रोहिणी ने बाद में आरोप लगाया था कि संजय यादव का नाम लेने पर ही उन्हें (रोहिणी को) गाली दी गई और उन पर चप्पल फेंकी गई।

‘पार्टी पर कब्जा’ और ‘टिकट में धांधली’ के आरोप

राजद कार्यकर्ताओं और नेताओं का गुस्सा सिर्फ हार को लेकर नहीं है। संजय यादव पर पहले से ही गंभीर आरोप लगते रहे हैं:

  • टिकट बंटवारा: कई नेताओं ने आरोप लगाया था कि टिकट बंटवारे के दौरान “पैसा नहीं देने के कारण” संजय यादव ने उनके टिकट काट दिए।

  • गठबंधन में कलह: महागठबंधन में कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे की किचकिच और 11 सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” को भी तेजस्वी की नाकामी के तौर पर देखा गया, जिसके लिए संजय यादव की रणनीतियों को जिम्मेदार ठहराया गया।

  • पार्टी पर कब्जा: राजद के कई नेता आरोप लगाते रहे हैं कि संजय यादव ने पार्टी पर “कब्जा” जमा लिया है और उनकी मर्जी के बिना कोई भी नेता तेजस्वी यादव से मिल तक नहीं सकता।

Sanjay Yadav Controversy: 75 से 25 सीटों पर सिमटी RJD

एनडीए के हाथों राजद को ऐसी करारी शिकस्त मिली है कि पार्टी 2020 की 75 सीटों से घटकर महज 25 सीटों पर सिमट गई है। खुद तेजस्वी यादव राघोपुर सीट पर हारते-हारते बड़ी मुश्किल से जीते। पार्टी की इतनी सीटें भी बमुश्किल आई हैं कि तेजस्वी का नेता विपक्ष का ओहदा बाल-बाल बच गया। (मुख्य विपक्षी दल के दर्जे के लिए 25 सीटों की जरूरत होती है)। पूरा महागठबंधन 2020 की 110 सीटों से घटकर 35 पर आ गया है, जिसमें कांग्रेस 19 से 6 और लेफ्ट पार्टियां 16 से 3 सीटों पर सिमट गईं।

23% वोट, फिर भी हार: सीटों में क्यों नहीं बदले वोट?

विश्लेषण के अनुसार, राजद को राज्य भर में करीब 23% वोट मिला, लेकिन यह वोट सीटों में तब्दील नहीं हो सका। जिन सीटों पर राजद लड़ी, वहां उसे औसतन 38.9% वोट मिले। इसके विपरीत, एनडीए के दलों ने अपनी-अपनी लड़ी गई सीटों पर जबरदस्त वोट बटोरे (बीजेपी 48.6%, जेडीयू 46.3%)। यह दिखाता है कि एनडीए का वोट एकजुट रहा, जबकि महागठबंधन का वोट बिखर गया या जीत के लिए अपर्याप्त साबित हुआ।

 

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