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आयकर रिफंड में देरी पर बड़ा सवाल, बजट 2026 से टैक्सपेयर्स को क्या राहत मिलेगी? जानिए 3 बड़े सुझाव

On: January 20, 2026 1:22 PM
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आयकर रिफंड में देरी पर बड़ा सवाल
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2025 में पूरे देश में लाखों टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिफंड में देरी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई। कई मामलों में, रिफंड रोक दिए गए, नोटिस जारी होते रहे, और ब्याज को लेकर लगातार बदलते नियमों ने टैक्सपेयर्स की निराशा को और बढ़ा दिया।
अब, 1 फरवरी, 2026 को पेश होने वाले यूनियन बजट से पहले, टैक्स एक्सपर्ट्स ने सरकार को कुछ अहम सुझाव दिए हैं जो टैक्स सिस्टम को ज़्यादा निष्पक्ष, ज़्यादा पारदर्शी और टैक्सपेयर्स के लिए ज़्यादा आसान बना सकते हैं।

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1. रिफंड और टैक्स डिमांड पर ब्याज दरों में समानता की मांग
फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) के एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को टैक्सपेयर्स से लिए जाने वाले ब्याज और टैक्सपेयर्स को दिए जाने वाले ब्याज के बीच समानता लानी चाहिए।

मौजूदा स्थिति
  •इनकम टैक्स एक्ट की धारा 244A के तहत रिफंड पर ब्याज: 0.5% प्रति माह
•धारा 234A, 234B, और 234C के तहत टैक्सपेयर्स से लिया जाने वाला ब्याज: 1% प्रति माह
•रिफंड पर मिला ब्याज टैक्सेबल है।
•हालांकि, टैक्सपेयर्स द्वारा दिए गए ब्याज पर कोई टैक्स कटौती नहीं है।
एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि यह सिस्टम गलत है और इस असमानता को बजट 2026 में ठीक किया जाना चाहिए।

2. रिफंड की रकम पर ब्याज को लेकर कन्फ्यूजन
सेक्शन 244A में यह साफ़ तौर पर नहीं बताया गया है कि ब्याज सिर्फ़ मूल टैक्स रकम पर दिया जाएगा या पूरी रिफंड रकम पर, जिसमें ब्याज, पेनल्टी और दूसरे कॉम्पोनेंट भी शामिल हैं।

 असर:
  •अलग-अलग मतलब निकाले जाना
•बेवजह कानूनी विवाद
•कोर्ट केस में बढ़ोतरी
एक्सपर्ट्स ने मांग की है कि इस मुद्दे को सुलझाने और भविष्य में होने वाले कन्फ्यूजन को रोकने के लिए बजट में एक साफ़ कानूनी प्रावधान शामिल किया जाए।

3. गलत टैक्स डिमांड के कारण रोके गए रिफंड: 12% ब्याज की मांग
कई मामलों में, गलत टैक्स डिमांड के बहाने टैक्सपेयर्स के रिफंड रोक दिए जाते हैं, जबकि कोर्ट पहले ही ऐसे डिमांड को अवैध घोषित कर चुके हैं।

विशेषज्ञों के सुझाव:
  •बिना लिखित नोटिस के रिफंड एडजस्ट नहीं किया जाना चाहिए।
•टैक्सपेयर की आपत्तियों को सुने बिना कोई कटौती नहीं की जानी चाहिए।
•गलत टैक्स डिमांड या TDS क्रेडिट में गलतियों के कारण रोके गए रिफंड पर 12% सालाना ब्याज दिया जाना चाहिए।

यह मुद्दा ट्रेंडिंग क्यों है?

•लाखों टैक्सपेयर्स प्रभावित
•डिजिटल सिस्टम होने के बावजूद रिफंड में देरी
•CPC और TRACES की जवाबदेही पर सवाल उठे
•बजट 2026 से बहुत उम्मीदें

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अगर इन सुझावों को 2026 के बजट में अपनाया जाता है, तो यह टैक्स देने वालों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है। इसके अलावा, यह भारत के टैक्स सिस्टम को ज़्यादा पारदर्शी, भरोसेमंद और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक अहम कदम होगा।

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