India GDP: भारतीय अर्थव्यवस्था ने तमाम वैश्विक चुनौतियों के बीच एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 8.2% का आंकड़ा छू लिया है। यह पिछले 18 महीनों (लगातार 6 तिमाहियों) में दर्ज की गई सबसे तेज रफ्तार है।

India GDP : पिछली तिमाही और पिछले साल से काफी आगे
आंकड़े बताते हैं कि भारत की विकास गाथा लगातार मजबूत हो रही है।
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मौजूदा तिमाही (Q2): 8.2%
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पिछली तिमाही (Q1): 7.8% (अप्रैल-जून)
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पिछले साल की समान तिमाही: 5.6%
यह उछाल स्पष्ट करता है कि अर्थव्यवस्था ने न केवल पिछले साल के मुकाबले, बल्कि इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले भी बेहतर प्रदर्शन किया है।
India GDP : इन सेक्टर्स ने दी रफ्तार
जीडीपी में इस शानदार तेजी का मुख्य कारण उपभोक्ताओं द्वारा खर्च में बढ़ोतरी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बेहतरीन प्रदर्शन माना जा रहा है।
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वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज: सर्वाधिक 10.2% की वृद्धि।
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सर्विस सेक्टर: 9.2% की मजबूत ग्रोथ।
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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: 9.1% की शानदार तेजी।
GST कटौती का असर अभी बाकी
रिपोर्ट में बताया गया है कि 22 सितंबर से 375 वस्तुओं पर जीएसटी दरों में की गई कटौती का इस तिमाही के आंकड़ों पर केवल आंशिक (मामूली) असर पड़ा है, क्योंकि यह तिमाही खत्म होने से कुछ दिन पहले ही लागू हुई थी। विश्लेषकों का मानना है कि सस्ती हुई वस्तुओं और बढ़ी हुई मांग का असली और व्यापक असर दिसंबर तिमाही (Q3) के आंकड़ों में देखने को मिलेगा, जिससे ग्रोथ और तेज हो सकती है।
राजकोषीय घाटे पर नजर
जहां जीडीपी के आंकड़े खुश करने वाले हैं, वहीं राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) सरकार के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
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अप्रैल से अक्टूबर (7 महीने) में राजकोषीय घाटा बढ़कर 8.25 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
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यह पूरे साल के अनुमान का 52.6% है, जो पिछले साल इसी अवधि में 46.5% था।
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सरकार ने इस वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.8% से घटाकर 4.4% पर लाने का लक्ष्य रखा है।
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इस अवधि में सरकार की कुल कमाई 18 लाख करोड़ और कुल खर्च 26.25 लाख करोड़ रुपये रहा।






