Ranchi News: बीजेपी प्रदेश कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पेसा एक्ट में किए गए बदलावों को लेकर हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जानबूझकर जनता को गुमराह किया है और कानून की मूल भावना से छेड़छाड़ की है।

मरांडी ने कहा कि PESA एक्ट 1996 में आदिवासी समुदाय की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए बनाया गया था। इस कानून का मूल सिद्धांत पारंपरिक कानून पर आधारित है, जो आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और मान्यताओं को मान्यता देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस कानून को लागू करने के लिए नियम और कानून बनाते समय उन लोगों को ही बाहर कर दिया, जिनके लिए यह कानून बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने पारंपरिक विश्वासों, रीति-रिवाजों और धार्मिक प्रथाओं को छोड़ देता है, तो वह ग्राम सभा (गांव परिषद) का मुखिया नहीं बन सकता और न ही उसे बनना चाहिए। ऐसा करना पेसा एक्ट और संविधान दोनों की भावना के खिलाफ होगा। मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार ने आदिवासी समुदाय की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को कमजोर करने के लिए कदम उठाए हैं।
विपक्ष के नेता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार इन बदलावों को वापस नहीं लेती है, तो बीजेपी लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए हर गांव में जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन लोगों के अधिकार छीन लिए हैं, जिनके विश्वास और परंपराएं ही इस कानून की नींव हैं।
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मरांडी ने कहा कि आदिवासी समुदायों की मान्यताएं और पूजा-पाठ के तरीके दूसरे समुदायों से अलग हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक उनके रीति-रिवाज और परंपराएं अनोखी हैं और सम्मान के लायक हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार PESA एक्ट के मूल स्वरूप को बनाए रखे और इसमें किए गए बदलावों को तुरंत वापस ले।







