प्रयागराज में सोमवार को Mahakumbh के प्रथम स्नान पर्व के दौरान भारी भीड़ और घने कोहरे के बीच 250 से अधिक लोग अपनों से बिछड़ गए। मेला प्रशासन ने ‘भूले-भटके शिविर’ और खोया-पाया केंद्रों के माध्यम से इन लोगों को उनके परिजनों से मिलाने में सफलता पाई।
Mahakumbh: प्रशासन की पहल और तकनीकी सहयोग
उत्तर प्रदेश सरकार ने मेले में उमड़ने वाली भीड़ को संभालने और बिछड़े हुए लोगों को मिलाने के लिए व्यापक प्रबंध किए थे। इन प्रबंधों में भूले-भटके शिविर, पुलिस सहायता केंद्र, वॉच टावर, और डिजिटल तकनीक से लैस खोया-पाया केंद्र शामिल थे। लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार घोषणाएं की जा रही थीं, जिससे लापता लोगों को ढूंढने में मदद मिली।
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Mahakumbh: प्रभावशाली कामगिरी
उत्तर प्रदेश नागरिक सुरक्षा के वार्डन नितेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि स्नान शुरू होने के पहले डेढ़ घंटे में ही 200-250 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता मिली। नागरिक सुरक्षा विभाग और मेला अधिकारियों की सक्रियता की वजह से यह संभव हो पाया।
श्रद्धालुओं का अनुभव
दिल्ली से आए श्रद्धालु अजय गोयल ने अपने परिजनों से बिछड़ने का अनुभव साझा करते हुए कहा, “पहले हम इस पर मजाक करते थे, लेकिन अब समझ आया कि कुंभ मेले में बिछड़ने की घटना कितनी वास्तविक है। प्रशासन की व्यवस्था शानदार है, लाउडस्पीकर और खोया-पाया केंद्र बहुत मददगार साबित हुए।”
परिजनों से बिछड़ने की भावुक कहानियां
संगम स्नान के लिए आई सुजाता झा ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य तीन घंटे से लापता थे। उनका सामान और फोन भी परिवार के पास ही था, और वह भीगे कपड़ों में उनका इंतजार कर रही थीं। इसी तरह, शाहजहांपुर की ओमवती ने कहा कि वह दो अन्य लोगों के साथ आई थीं, लेकिन उनसे बिछड़ गईं।
सराहनीय व्यवस्थाएं
प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर घोषणाओं, सोशल मीडिया का इस्तेमाल, और खोया-पाया केंद्रों की त्वरित कार्रवाई ने इन भावुक परिस्थितियों में राहत पहुंचाई। उत्तर प्रदेश सरकार ने बयान में कहा कि खोया-पाया केंद्रों में आधुनिक तकनीकों और सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल किया गया, जिससे बिछड़े हुए लोगों को परिजनों से मिलाने में सफलता मिली।
महाकुंभ के पहले दिन प्रशासन की त्वरित और प्रभावी व्यवस्था ने कई परिवारों को राहत पहुंचाई और मेले में सुरक्षित अनुभव सुनिश्चित किया।