Bihar News: बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए नीतीश सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जमीन की ई-मापी (E-Maapi) रिपोर्ट के लिए अब विभाग द्वारा निर्धारित ‘प्रोफार्मा’ (Proforma) का इस्तेमाल अनिवार्य होगा।

गुरुवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य रैयतों (जमीन मालिकों) को सहूलियत देना और अमीनों की मनमानी पर रोक लगाना है। उन्होंने अधिकारियों को सभी अंचलों में तैनात अमीनों के कार्यों का आकलन कर रिपोर्ट सौंपने का भी आदेश दिया।
पुराने कागजात पढ़ने के लिए मिलेंगे एक्सपर्ट
बिहार में जमीन के पुराने दस्तावेज अक्सर ‘कैथी लिपि’ में होते हैं, जिन्हें पढ़ने में आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए विजय सिन्हा ने हर जिले में कैथी लिपि विशेषज्ञों का एक पैनल बनाने का निर्देश दिया है। इन विशेषज्ञों की सूची सभी अंचल कार्यालयों (Circle Offices) में लगाई जाएगी ताकि लोग आसानी से उनसे संपर्क कर अपने कागजात समझ सकें।
लैंड माफिया पर कसा शिकंजा, बन सकता है नया कानून
मंत्री ने जमीन माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गलत कागजात बनाकर जमीन कब्जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों की शिकायत मिलते ही उच्चस्तरीय टीम जांच करेगी। विजय सिन्हा ने यह भी संकेत दिया कि अगर जरूरत पड़ी, तो ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से नया और सख्त कानून भी बनाया जा सकता है।
दाखिल-खारिज के लिए 90 दिन की समय सीमा
आम जनता की सुविधा के लिए मंत्री ने सभी रजिस्ट्री कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे लोगों को जागरूक करें। जमीन की रजिस्ट्री होने के 90 दिनों के भीतर दाखिल-खारिज (Mutation) के लिए आवेदन करना अनिवार्य बताया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो। साथ ही, ‘बिहार भूमि पोर्टल’ का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने को कहा गया है।





