Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। पार्टी के भीतर 15 साल पुराने गठबंधन के दौर को खत्म कर एक बार फिर ‘एकला चलो’ की राह पर चलने का मंथन शुरू हो गया है। सोमवार को पटना स्थित सदाकत आश्रम में हुई समीक्षा बैठक में नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर निर्भरता खत्म कर अपनी ‘स्वतंत्र पहचान’ बनाने की पुरजोर वकालत की।

Bihar Politics: राजद के साथ से धूमिल हुई पार्टी की पहचान
प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वरिष्ठ नेताओं का दर्द छलक उठा। नेताओं ने दो टूक कहा कि लगातार राजद के साथ गठबंधन में रहने के कारण कांग्रेस की वैचारिक और संगठनात्मक पहचान धूमिल हो गई है।
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नेताओं का तर्क था कि गठबंधन की राजनीति और सीट शेयरिंग के गणित ने स्थानीय नेतृत्व को पनपने ही नहीं दिया।
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बैठक में सुझाव दिया गया कि जनता के बीच कांग्रेस की अलग छवि तभी बनेगी, जब पार्टी अपनी लड़ाई खुद लड़ेगी और हर सीट पर मजबूत प्रत्याशी तैयार करेगी।
Bihar Politics: संगठन को धार देने के लिए जिला दौरा करेंगे नेता
बैठक में तय हुआ कि अब पूरा फोकस संगठन को जिला से लेकर पंचायत स्तर तक मजबूत करने पर होगा।
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इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता पूरे राज्य का सघन दौरा करेंगे।
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प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने संकेतों में स्पष्ट किया कि “गठबंधन चुनावी होते हैं और जब चुनाव आएंगे, तब आगे की रणनीति तय की जाएगी।” फिलहाल पार्टी स्वतंत्र रूप से जनता के मुद्दों को सड़क से सदन तक उठाएगी।
14 को दिल्ली में रैली, ‘वोट चोरी’ के खिलाफ हल्ला बोल
कांग्रेस ने हार के पीछे ‘वोट चोरी’ को भी एक वजह माना है और इसके खिलाफ ठोस मुहिम चलाने का फैसला किया है। बैठक में 14 तारीख को दिल्ली में होने वाली रैली की तैयारियों पर चर्चा हुई। देर शाम बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारू और प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी के सभी 6 विधायकों के साथ अलग से बैठक की। इस दौरान विधानमंडल दल के पूर्व नेता शकील अहमद खान और सभी जिलाध्यक्ष मौजूद रहे।





