New Delhi: संसद में चुनाव प्रणाली और ईवीएम (EVM) को लेकर चल रही बहस के दौरान सत्ताधारी एनडीए गठबंधन एकजुट नजर आया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस और विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। केंद्रीय मंत्री और जेडीयू सांसद राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने विपक्ष के “दोहरे चरित्र” की पोल खोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग को बदनाम करना बंद होना चाहिए।

हारते ही खराब हो जाती है EVM: राजीव रंजन सिंह
लोकसभा में अपनी बात रखते हुए राजीव रंजन सिंह ने कहा कि विपक्ष की ईवीएम को लेकर शिकायतें उनकी जीत और हार पर निर्भर करती हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जब कांग्रेस या विपक्षी दल तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में चुनाव जीतते हैं, तब ईवीएम बिल्कुल ठीक काम करती है। लेकिन जैसे ही महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार में एनडीए की जीत होती है, तो अचानक ईवीएम ‘हैक’ हो जाती है या खराब बता दी जाती है।” उन्होंने याद दिलाया कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार भी 10 साल तक इसी ईवीएम प्रणाली के जरिए सत्ता में रही थी, तब उन्हें मशीन में कोई खराबी नजर नहीं आई।
बूथ कैप्चरिंग के दौर में लौटना चाहता है विपक्ष: राजीव रंजन सिंह
बैलेट पेपर (मतपत्र) से दोबारा चुनाव कराने की विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए जेडीयू नेता ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईवीएम ने चुनावों को निष्पक्ष बनाया है, जबकि विपक्ष बैलेट पेपर की मांग इसलिए कर रहा है ताकि वे फिर से ‘बूथ कैप्चरिंग’ के दौर को वापस ला सकें।
चुनाव आयोग के काम में मोदी सरकार का दखल नहीं
राजीव रंजन सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार संवैधानिक संस्थाओं, विशेषकर चुनाव आयोग के कामकाज में कभी हस्तक्षेप नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मौजूदा विपक्ष सत्ता में था, तब वे संस्थाओं के काम में दखल देते थे। मतदाताओं के सत्यापन (Verification) के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नागरिकों की पहचान सत्यापित करना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है और इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।





