Munger News: दिवाली के एक दिन बाद, जब ज़्यादातर जगहों पर रोशनी कम हो जाती है, मुंगेर का ऐतिहासिक पोलो ग्राउंड नई रौशनी से जगमगा उठता है। यहाँ रोशनी का एक ऐसा उत्सव मनाया गया, जहाँ रोशनी सिर्फ़ दीयों की नहीं, बल्कि भावनाओं, उम्मीदों और परंपराओं की भी थी।

हर साल की तरह इस साल भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने मिलकर इस आयोजन को ख़ास बनाया। मैदान पर एक साथ जलते 21,000 दीये न सिर्फ़ रोशनी के प्रतीक थे, बल्कि हर दीया हर युवा के सपनों की लौ की तरह जगमगा रहा था।
रंग-बिरंगी रंगोलियों, उड़ते गुब्बारों और उमड़ती भीड़ के बीच, यह उत्सव न सिर्फ़ आँखों से, बल्कि दिल से भी महसूस किया जाने वाला अनुभव बन गया। लोग यहाँ सिर्फ़ दीये देखने नहीं, बल्कि युवाओं की मेहनत और लगन से निकलती ऊर्जा को महसूस करने आए थे।
आयोजन समिति के अरविंद कुमार ने बताया कि यह परंपरा पिछले 30-35 सालों से चली आ रही है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ़ दीप जलाने का उत्सव नहीं है। यह उन युवाओं को श्रद्धांजलि देने का अवसर है जिन्होंने इसी धरती से शुरुआत की और आज देश की सेवा कर रहे हैं।”
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इस आयोजन की तैयारी में युवाओं ने तीन दिनों तक अथक परिश्रम किया। जब शाम ढली और सभी 21,000 दीप एक साथ जले, तो पूरा मैदान मानो कह रहा था – “सपने तभी साकार होते हैं जब दिल अपनी धरती से जुड़ा रहता है।”





