Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में अब हिसाब-किताब का वक्त आ गया है। गुरुवार को दिल्ली में पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व हार की समीक्षा के लिए एक मैराथन बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में चुनाव लड़ने वाले सभी 61 उम्मीदवारों की ‘रिपोर्ट कार्ड’ जांची जाएगी और हार के कारणों की फाइल खुलेगी।

बिहार कांग्रेस: खरगे और राहुल के सामने होगी ‘पेशी’
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। हारने वाले प्रत्याशियों को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी कि आखिर वे चुनाव क्यों हारे?
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गौरतलब है कि इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन इतना निराशाजनक रहा कि 61 में से 90% उम्मीदवार चुनाव हार गए।
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शर्मनाक स्थिति यह रही कि खुद प्रदेश अध्यक्ष और विधानमंडल दल के नेता भी अपनी सीट नहीं बचा पाए।
प्रत्याशियों की दलील: बूथ प्रबंधन और गठबंधन रहा कमजोर
जानकारी के मुताबिक, अधिकांश उम्मीदवारों ने अपनी रिपोर्ट में हार का ठीकरा संगठन की कमजोरियों पर फोड़ा है। उनकी रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन बातें कही गई हैं:
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बूथ मैनेजमेंट: जमीनी स्तर पर बूथ प्रबंधन पूरी तरह विफल रहा।
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गठबंधन: सहयोगी दलों के साथ समन्वय की कमी और गठबंधन का वोट ट्रांसफर न होना।
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भितरघात: जिन नेताओं के टिकट काटे गए, उन्होंने चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाया।
आलाकमान का सख्त रुख: अब तय होगी जवाबदेही
केंद्रीय नेतृत्व इस बार रटे-रटाए बहाने सुनने के मूड में नहीं है। आलाकमान की चिंता यह है कि तमाम संसाधनों और बड़े नेताओं के प्रचार के बावजूद, पिछले ढाई दशक से बिहार में पार्टी का प्रदर्शन सुधर क्यों नहीं रहा है? माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद बिहार कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव हो सकते हैं और शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही तय की जा सकती है।
बिहार कांग्रेस: बागी नेताओं का दिल्ली में जमावड़ा, गूंजेगा ‘टिकट बिक्री’ का मुद्दा
आधिकारिक बैठक से पहले ही बिहार कांग्रेस के नाराज और बागी गुट ने भी दिल्ली में डेरा डाल दिया है। इनमें पूर्व विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं।
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गंभीर आरोप: ये नेता आलाकमान से मिलकर यह बताने की कोशिश करेंगे कि हार की असली वजह टिकट वितरण में हुई ‘खरीद-बिक्री’ है।
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इनका आरोप है कि जिताऊ उम्मीदवारों को दरकिनार कर पैसे के बल पर कमजोर उम्मीदवारों को टिकट दिए गए, जिससे पार्टी की लुटिया डूबी।
कुल मिलाकर, गुरुवार की यह बैठक बिहार में कांग्रेस की भविष्य की दशा और दिशा तय करने वाली साबित होगी।






