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लोहरदगा के अरू गांव में भव्य तरीके से मनाया गया हनुमान जयंती महोत्सव

On: April 3, 2026 1:04 PM
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लोहरदगा के अरू गांव में भव्य तरीके से मनाया गया हनुमान जयंती महोत्सव
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झारखंड के लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड के तहत अरू गांव में इस वर्ष हनुमान जयंती का पर्व अद्भुत उत्साह, आस्था और पारंपरिक वीरता के प्रदर्शन के साथ मनाया गया। पावन अवसर पर आयोजित भव्य मेला सह अस्त्र-शस्त्र चालन प्रतियोगिता ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और ऊर्जावान बना दिया।

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सुबह से ही गांव में श्रद्धालुओं, ग्रामीणों और विभिन्न अखाड़ों के सदस्यों की भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान हनुमान की विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद सुदर्शन भगत और विशिष्ट अतिथि सरना सनातन नेत्री निशा भगत सहित कई गणमान्य लोगों ने पूजा कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इसके बाद गाजे-बाजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर भव्य जुलूस निकाला गया। अखाड़ों के युवाओं ने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र के साथ शानदार करतब और युद्ध कौशल का प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर ओर “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

कार्यक्रम के दौरान निशा भगत ने अपने संबोधन में सरना और सनातन समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि दोनों समाज सदियों से जुड़े हैं और किसी भी परिस्थिति में उनकी एकता को तोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भगवान हनुमान की जन्मस्थली पर आज भी सरना समाज के पहान द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है, जो इस गहरी सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।

अस्त्र-शस्त्र चालन प्रतियोगिता में विभिन्न अखाड़ों के प्रतिभागियों ने अपने अद्भुत कौशल का प्रदर्शन किया। इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों, आयोजन समिति और युवाओं की अहम भूमिका रही। भारी भीड़ और जोश-खरोश के बीच यह पर्व एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती?

हनुमान जयंती भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, जो शक्ति, भक्ति, निष्ठा और साहस के प्रतीक माने जाते हैं।

भगवान हनुमान, भगवान राम के परम भक्त और उनके सबसे बड़े सहयोगी थे। उन्होंने अपने बल, बुद्धि और भक्ति से असंभव कार्यों को संभव किया जैसे संजीवनी बूटी लाना और लंका दहन करना। हनुमान जी को संकट मोचन कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हनुमान जयंती हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति, निस्वार्थ सेवा और साहस के साथ जीवन की हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।

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