झारखंड की राजधानी रांची में ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और आकर्षक झांकियों के साथ दिखा आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम। झारखंड में आज प्रकृति पर्व सरहुल की धूम पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ देखने को मिली। रांची में निकाली गई सरहुल शोभायात्रा ने अपनी भव्यता और सांस्कृतिक विविधता से सभी का मन मोह लिया। यह ऐतिहासिक शोभायात्रा मुख्य रूप से हातमा सरना स्थल एवं शहर के विभिन्न अखाड़ों से निकलकर सिरम टोली सरना स्थल तक पहुंची।

शोभायात्रा के दौरान आदिवासी रीति-रिवाजों और परंपराओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। ढोल और मांदर की गूंजती थाप पर युवक-युवतियां नाचते-गाते हुए पूरे मार्ग में उत्सव का माहौल बनाते नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग सरना झंडा लिए चल रहे थे, वहीं विभिन्न झांकियों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की गई।
शोभायात्रा में शामिल पाहन श्रद्धालुओं को फूलखोंसी करते दिखाई दिए। शहर के विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच बनाकर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया।
इसी क्रम में चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति द्वारा बनाए गए स्वागत मंच से शोभायात्रा का अभिनंदन किया गया। मंच पर भगवान बिरसा मुंडा और मां सरना की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। यहां शोभायात्रा में शामिल लोगों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। पाहन को माला पहनाकर और गमछा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
स्वागत कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबुलाल मरांडी का भी समिति के अध्यक्ष रमेश सिंह द्वारा अभिनंदन किया गया। समिति की ओर से शोभायात्रा में शामिल लोगों के लिए शीतल पेय और खाद्य पदार्थों का वितरण भी किया गया, जिससे उत्सव का आनंद और भी बढ़ गया।
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