झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.58 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट पेश किया है। इस बजट को राज्य के सर्वांगीण विकास का रोडमैप बताया जा रहा है। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने इस बजट में गरीब, किसान, आदिवासी, महिला और युवाओं को केंद्र में रखकर योजनाओं का खाका तैयार किया गया है। सरकार का दावा है कि यह बजट सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है।
बजट में शिक्षा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। राज्य में 100 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और 5 बालिका आवासीय विद्यालय खोलने की घोषणा की गई है। धनबाद में 2, पलामू, लातेहारल और गढ़वा में 1-1 बालिका आवासीय विद्यालय खोले जाएंगे। सरकार के इस कदम से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के छात्रों को बेहतर शिक्षा सुविधा मिल सकेगी। इस बजट में स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और आधारभूत ढांचे के विस्तार पर भी विशेष फोकस किया गया है।

सरकार ने महिला और बाल विकास को मजबूत करने के लिए जेंडर और चाइल्ड बजट को प्रमुख स्थान दिया है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार के साथ ही कमजोर वर्गों के लिए सहायता कार्यक्रमों को भी बढ़ाने की योजना है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य की विकास दर लगभग 5.96 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार ने राज्य की आधी आबादी और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सबसे बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, उनके पोषण और सर्वांगीण विकास के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। यह राशि महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में मील का पत्थर साबित होगी। बाल बजट पिछले साल के 9411 करोड़ रुपए से 15 परसेंट बढ़ाकर 1793 करोड़ रुपए कर दिया गया है। वहीं जेंडर बजट के लिए 34211 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
ग्रामीण झारखंड की तस्वीर बदलने के लिएग्रामीण विकास पर 12,346 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया है। इस बजट प्रावधान से गांवों में सड़क, आवास और आजीविका के साधनों का विकास और विस्तार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बजट को राज्य के समावेशी विकास का दस्तावेज़ बताते हुए कहा कि इससे हर वर्ग को लाभ मिलेगा और विकास की गति तेज होगी। वहीं विपक्ष ने कई घोषणाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए।





