असम विधानसभा में 15 साल बाद JMM की वापसी हो रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा के लिए अपने 21 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। असम विधानसभा का चुनाव 9 अप्रैल को होना है।

पार्टी का लक्ष्य चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों और आदिवासियों को अपने पक्ष में करना है। करीब 60 लाख आदिवासी चाय बागानों से जुड़े कार्यों में लगे हैं। इन आदिवासियों में से ज्यादातर के पूर्वज झारखंड से ही असम आए हैं। ये आदिवासी करीब 36 सीटों के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
इससे पहले 2011 में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 9 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली थी। उस दौरान JMM को करीब 1 प्रतिशत वोट मिले थे।
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने पिछले साल ही असम के चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों के लिए एक पैनल का गठन किया था। तभी से लगने लगा था कि इस बार JMM असम के चुनाव में अपने प्रत्याशी जरूर उतारेगी। कांग्रेस से सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनने के बाद पार्टी ने अकेले दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। हम आपको बता दें कि झारखंड में JMM और कांग्रेस की मिली-जुली सरकार है, लेकिन अब असम चुनाव में दोनों के बीच आमने-सामने की टक्कर होगी।
Also Read- कल की भारी गिरावट के बाद आज संभला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 700 प्वाइंट तो निफ्टी 250 प्वाइंट उछला





