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महाशिवरात्रि 2026: भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का महान अवसर

On: February 2, 2026 8:07 PM
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महाशिवरात्रि 2026: भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का महान अवसर
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महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह वह रात है जब भक्त भगवान शिव की आराधना में पूरी रात जागरण करते हैं, व्रत रखते हैं और अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं। 2026 में महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को मनाई जाएगी। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे समाप्त होगी। इसलिए व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा और मुख्य पूजा रात में होगी।
महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं? महाशिवरात्रि का महत्व कई पौराणिक कथाओं से जुड़ा है

शिव-पार्वती विवाह: इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह दांपत्य सुख, प्रेम और पारिवारिक सौभाग्य का प्रतीक है।

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समुद्र मंथन: जब हलाहल विष निकला, तो भगवान शिव ने उसे कंठ में धारण किया। इस दिन उनकी पूजा से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शिव तांडव: भगवान शिव ने इस रात तांडव नृत्य किया था।

शिकारी की कथा: एक शिकारी ने अनजाने में बेल पत्र चढ़ाकर शिव की पूजा की और मोक्ष प्राप्त किया। इससे सिद्ध होता है कि सच्ची भक्ति से कोई भी मुक्ति पा सकता है।

यह त्योहार अंधकार (अज्ञान) को दूर कर ज्ञान का दीप जलाने का प्रतीक है। व्रत और जागरण से मनुष्य अपने भीतर के शिव तत्व को जागृत करता है।

महाशिवरात्रि 2026 की शुभ पूजा मुहूर्त निशीथ काल पूजा (सबसे महत्वपूर्ण): 15 फरवरी की रात 12:09 बजे से 16 फरवरी की सुबह 1:01 बजे तक।

रात्रि के चार प्रहर (चारों में पूजा करने का विधान है)

पहला प्रहर: शाम 6:23 बजे से 9:32 बजे तक

दूसरा प्रहर: 9:32 बजे से 12:41 बजे (रात) तक

तीसरा प्रहर: 12:41 बजे से 3:47 बजे (सुबह) तक

चौथा प्रहर: 3:47 बजे से 6:59 बजे तक

पारण समय (व्रत खोलने का समय)

16 फरवरी को सुबह सूर्योदय के बाद, लेकिन चतुर्दशी समाप्त होने से पहले (आमतौर पर सुबह 6:59 बजे से दोपहर तक)।

निशीथ काल में पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि इसी समय भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे।

व्रत नियम
फलाहार करें (फल, दूध, मखाना, साबूदाना)। नमक, अनाज, तामसिक भोजन से दूर रहें। क्रोध, झूठ से बचें।
महाशिवरात्रि पूजा कैसे करें? 

  1. संकल्प लें: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लें कि आज शिव-पार्वती की पूजा और व्रत रखेंगे।
  2. शाम को स्नान: शाम को गंगाजल मिले पानी से स्नान करें।
  3. पूजा स्थल तैयार करें: शिवलिंग या शिवजी की मूर्ति को साफ करें। आसन बिछाएं।
  4. अभिषेक: शिवलिंग पर क्रम से जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल चढ़ाएं। बेल पत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग (यदि उपलब्ध हो) चढ़ाएं। सबसे महत्वपूर्ण बेल पत्र (बिना तने के) चढ़ाना है।
  5. द्रव्य चढ़ाएं: फल (केला, सेब), मिठाई (बिना लहसुन-प्याज), अगरबत्ती, दीपक, चंदन, कुमकुम लगाएं।
  6. मंत्र जप:
    • मुख्य मंत्र: ॐ नमः शिवाय (जितना हो सके जपें)
    • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
    • अन्य: ॐ नमो भगवते रुद्राय या ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
  7. आरती: शिव आरती गाएं – ॐ जय शिव ॐकारा…
  8. जागरण: पूरी रात भजन-कीर्तन करें, शिव कथाएं सुनें।
  9. पारण: अगले दिन सुबह फलाहार से व्रत खोलें।

शिवरात्रि पर भक्त उपवास रखते हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वैवाहिक जीवन सुखी रहता है और दुख–कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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