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चिराग की जीत पर पशुपति कुमार पारस ने दी शुभकामनाएं, सुलह के क्या हैं सियासी मायने?

On: November 18, 2025 10:18 AM
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चिराग की जीत पर पशुपति कुमार पारस ने दी शुभकामनाएं, सुलह के क्या हैं सियासी मायने?
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Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को मिली प्रचंड जीत के बीच सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के प्रदर्शन की हो रही है। इस बीच, बिहार की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब चिराग के चाचा और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने अपने भतीजे को इस ‘शानदार जीत’ के लिए बधाई दी। पशुपति पारस, जिन्होंने 2021 में पार्टी तोड़कर चिराग पासवान को राजनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया था, उनके इस बधाई संदेश के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

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पशुपति कुमार पारस ने ‘एक्स’ पर क्या लिखा?

पशुपति पारस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने भतीजे को टैग करते हुए लिखा, “मेरे भतीजे, केन्द्रीय मंत्री और लोजपा(र) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान जी को बिहार विधान सभा 2025 में मिली शानदार जीत के लिए बधाई और शुभकामनाएं।”

क्या हैं सियासी मायने?

पारस के इस पोस्ट को चाचा-भतीजे के बीच सुलह की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। 2021 में पशुपति पारस ने लोजपा के पांच सांसदों के साथ पार्टी तोड़ दी थी, जिससे चिराग पासवान अकेले पड़ गए थे। उनका पार्टी का नाम, चिन्ह और संसदीय पद तक छिन गया था। लेकिन, 2025 के नतीजों ने चिराग को बिहार की राजनीति में एक मजबूत ताकत के रूप में फिर से स्थापित कर दिया है। माना जा रहा है कि चिराग की इस राजनीतिक ताकत को देखते हुए अब पशुपति पारस अपने भतीजे से रिश्ते सुधारने की पहल कर रहे हैं। इससे पहले, पशुपति पारस के बेटे प्रिंस पासवान ने भी चिराग पासवान को उनके जन्मदिन पर बधाई दी थी।

चिराग की जीत की वाहवाही

बिहार चुनाव में एनडीए ने कुल 202 सीटें जीती हैं, जिसमें भाजपा को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। लेकिन, सबसे ज्यादा वाहवाही चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) को मिल रही है। 2020 के चुनाव में सिर्फ एक सीट जीतने वाली लोजपा (र) ने इस बार 28 सीटों पर चुनाव लड़कर 19 सीटों पर कब्जा किया है। स्ट्राइक रेट के मामले में चिराग ने एनडीए के सभी दलों को पीछे छोड़ दिया है। चिराग की इस जीत को उनकी मेहनत और राजनीतिक जज्बे की जीत माना जा रहा है, जिसने अब उनके पूर्व राजनीतिक विरोधियों (चाचा पारस) को भी बधाई देने पर मजबूर कर दिया है।

 

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