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Chirag Paswan जाति की राजनीति नहीं करते, बिहार के विकास की बात करते हैं- Prashant Kishor

On: September 23, 2025 6:21 PM
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Chirag Paswan जाति की राजनीति नहीं करते, बिहार के विकास की बात करते हैं- Prashant Kishor
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Bihar News: राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले Prashant Kishor ने हाल ही में लाइव हिंदुस्तान को दिए इंटरव्यू में चिराग पासवान की तारीफ की। उन्होंने कहा कि चिराग पारंपरिक जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर बिहार के विकास की बात करते हैं। इस बयान को बिहार की राजनीति में एक नई चर्चा की शुरुआत माना जा रहा है, जहां विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

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चिराग पासवान: एक युवा नेता की छवि

चिराग पासवान लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और दिवंगत रामविलास पासवान के पुत्र हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बना ली है। युवा, आक्रामक और तकनीक-प्रेमी चिराग खुद को विकासवादी राजनीति के समर्थक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। प्रशांत किशोर की प्रशंसा उनके इसी दृष्टिकोण को पुष्ट करती है।

जातिवाद से ऊपर उठने की कोशिश- PK

बिहार की राजनीति लंबे समय से जातिगत समीकरणों पर आधारित रही है। यादव, कुशवाहा, दलित, भूमिहार जैसे वोट बैंक अक्सर चुनावी रणनीति का केंद्र रहे हैं। लेकिन प्रशांत किशोर ने अपने बयान में साफ कर दिया कि चिराग पासवान इस पुरानी सोच से आगे बढ़कर राज्य के समग्र विकास की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि चिराग की राजनीति में जातिगत एजेंडे को प्रमुखता नहीं दी जाती है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

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बिहार की प्रगति पर बात- PK

प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि चिराग पासवान राज्य के युवाओं, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मुखर हैं। वह सिर्फ वादों की राजनीति नहीं करते, बल्कि भविष्य के बिहार का विजन लेकर लोगों के बीच जाते हैं।यह सोच राज्य के लिए एक नई दिशा तय कर सकती है।

राजनीतिक संकेत और भविष्य की रणनीति

राजनीतिक हलकों में इस साक्षात्कार को कई तरह से देखा जा रहा है।कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि भविष्य में प्रशांत किशोर और चिराग पासवान के बीच रणनीतिक गठबंधन हो सकता है। जबकि कुछ लोग इसे केवल सकारात्मक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं। जो भी हो, यह स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में अब विकास का मुद्दा जोर पकड़ रहा है।

प्रशांत किशोर का बयान सिर्फ़ चिराग़ पासवान की तारीफ़ नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव की ओर इशारा करता है। यदि युवा नेता जातिवाद से ऊपर उठकर विकास को प्राथमिकता दें तो बिहार अपनी खोई हुई पहचान और गति पुनः प्राप्त कर सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस नई सोच को कितना समर्थन देती है।

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