हावई इंधन और कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से होटल में खाना और हवाई सफर महंगा हो गया है। हवाई ईंधन यानी एटीएफ की बेस प्राइस में 25 फीसदी की बढ़तोरी की गई है। वहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है।

1883 रुपए में मिलने वाला कमर्शियल सिलेंडर अब 2078 रुपए में मिलेगा। पश्चिम एशिया संकट की वजह से तेल और गैस की सप्लाई में कमी की वजह से कीमतें बढ़ाई गईं हैं। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में एक महीने में तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है। 1 मार्च को कमर्शियल गैस के प्रति सिलेंड की कीमत 1768 रुपए 50 पैसे थी। हालांकि घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
मध्य पूर्व संकट और क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने की वजह से एटीएफ की बेस कीमतों में 25 परसेंट की बढ़ोतरी की गई है। भारत में हवाई ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। हालांकि सरकार ने घरेलू यात्रियों पर इसका पूरा असर पड़ने से बचाने के लिए एक चरणबद्ध बढ़ोतरी लागू की है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल के बावजूद घरेलू एयरलाइन्स पर 25% बेस प्राइस यानी करीब 8–9 फीसदी की ही बढ़ोतरी लागू की है।
दिल्ली में ATF की कीमत एक समय लगभग 115% बढ़कर 2.07 लाख रुपए प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थी। लेकिन घरेलू उड़ानों के लिए संशोधित कीमत लगभग 1.05 लाख रुपए प्रति किलोलीटर रखी गई है ताकि एयरलाइन्स की लागत नियंत्रित रहे। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और निजी चार्टर विमानों को ईंधन की पूरी बढ़ी हुई कीमत चुकानी होगी।
एयरलाइन्स के कुल खर्च का लगभग 40% हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। इसलिए इस तरह की बढ़ोतरी से हवाई किराए पर दिखना शुरू हो चुका है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडिगो ने ईंधन सरचार्ज की धोषणा कर दी है। कुछ एयरलाइन्स पहले ही टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाना शुरू कर दिया है जिससे आने वाले समय में किराए और बढ़ सकते हैं।
कुल मिलाकर होटल में खाना और हवाई सफर महंगा हो चुका है। अगर ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध और लंबा खिंचा और होर्मुज स्ट्रेट समस्या हल नहीं हुई तो ये कीमतें आने वाले दिनों में और बढ़ेंगी।
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