झारखंड के रामगढ़ जिला में बिरसा चौक के समीप बनी मिट्टी जांच प्रयोगशाला इन दिनों विवादों में घिर गई है। डीएमएफटी फंड से भवन विभाग द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से बनाई गई यह प्रयोगशाला सफेद हाथी साबित हो रही है।

प्रयोगशाला का उद्देश्य था कि रामगढ़ के किसानों की खेतों की मिट्टी की जांच कर उन्हें उर्वरक और खेती की सही जानकारी प्रदान की जाए। लेकिन सिर्फ सात सालों में भवन पूरी तरह जर्जर हो गया है। दीवारों में बड़ी दरारें, खिड़की और दरवाजे दीवार से अलग, और अंदर रखे गए उपकरण बेकार पड़े हुए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि भवन और उपकरण दोनों ही काम के लिए असुरक्षित हैं, और इसे बनाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। कर्मचारी भवन की स्थिति को देखकर खुद को जोखिम में महसूस करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी बड़ी लागत की परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही ने इसे निष्प्रभावी बना दिया है, जबकि इसका असली उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाना था।





