Anant Chaturdashi 2025: भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को देशभर में अनंत चतुर्दशी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के साथ-साथ गणेशोत्सव के समापन का भी प्रतीक है।

सुबह से ही मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ, वहीं घरों में व्रतधारियों ने विधिवत अनंत भगवान की पूजा कर अनंत सूत्र बांधा। 14 गांठों वाला यह पवित्र धागा जीवन में सुख, समृद्धि और संकटों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।
गणपति बप्पा मोरया: विसर्जन यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
अनंत चतुर्दशी के साथ ही गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव का भी समापन होता है। विभिन्न शहरों में गणेश विसर्जन के लिए भव्य झांकियों और शोभायात्राओं का आयोजन किया गया। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ भक्तों ने अपने आराध्य को विदाई दी।
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प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए थे। कई स्थानों पर विसर्जन घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। युवाओं और बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
धर्म और परंपरा का अद्भुत संगम
अनंत चतुर्दशी न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में संयम, श्रद्धा और समर्पण का भी प्रतीक है। व्रतधारियों ने भगवान विष्णु से जीवन में सुख-शांति और कल्याण की कामना की।





