वैज्ञानिक अंतरिक्ष से धरती पर बिजली भेजने की तैयारी में लगे हैं। भविष्य में बिजली उत्पादन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। वैज्ञानिक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत अंतरिक्ष में स्थापित सौर पैनलों से बिजली तैयार कर उसे सीधे धरती पर भेजा जाएगा। इस अवधारणा को “स्पेस-बेस्ड सोलर पावर” कहा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पृथ्वी पर लगे सौर पैनलों की सबसे बड़ी सीमा यह है कि वे रात में काम नहीं करते और बादल या खराब मौसम के दौरान उनका उत्पादन घट जाता है। इसके अलावा, वायुमंडल सूर्य की ऊर्जा का एक हिस्सा रोक लेता है। अंतरिक्ष में इन बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि वहां सूर्य का प्रकाश अधिक तीव्र और लगभग लगातार उपलब्ध रहता है।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
वैज्ञानिक अंतरिक्ष से धरती पर बिजली भेजने की योजना के तहत बड़े सौर पैनलों से लैस उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए जाएंगे। ये पैनल सूर्य की रोशनी को सीधे ग्रहण कर उसे विद्युत ऊर्जा में बदलेंगे। इसके बाद इस ऊर्जा को माइक्रोवेव या लेज़र बीम के माध्यम से पृथ्वी पर स्थित विशेष रिसीवर स्टेशनों तक भेजा जाएगा। वहां इसे दोबारा उपयोगी बिजली में परिवर्तित कर पावर ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
विशेषज्ञों ने इसके लिए दो प्रमुख मॉडल प्रस्ताव रखा है
1. भू-स्थिर कक्षा (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) मॉडल:
इसमें उपग्रह लगभग 35,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किए जाएंगे। इनका आकार बड़ा होगा और ये माइक्रोवेव के जरिए ऊर्जा भेजेंगे। यह प्रणाली मौसम से कम प्रभावित होगी, लेकिन इसकी लागत काफी अधिक मानी जा रही है।
2. निम्न पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) मॉडल:
इस मॉडल में उपग्रह लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहेंगे और लेज़र के माध्यम से ऊर्जा भेजेंगे। इनका वजन और लागत अपेक्षाकृत कम होगी, लेकिन पर्याप्त बिजली उत्पादन के लिए कई उपग्रहों की आवश्यकता पड़ सकती है।
संभावित लाभ
यदि यह तकनीक सफल होती है तो 24 घंटे निरंतर बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे दूरदराज क्षेत्रों तक ऊर्जा पहुंचाना संभव होगा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घट सकती है। साथ ही यह स्वच्छ ऊर्जा का एक स्थायी स्रोत बन सकता है।
चुनौतियां अभी बाकी
हालांकि अवधारणा आकर्षक है, लेकिन इसकी लागत, बड़े ढांचों को अंतरिक्ष में भेजने की जटिलता और दीर्घकालिक सुरक्षा परीक्षण जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे व्यावसायिक स्तर पर लागू करने में अभी समय लग सकता है।





