नई दिल्ली | कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज (9 दिसंबर) अपना 79वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर उन्होंने सियासी शोर-शराबे के बीच एक संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम संदेश दिया। सोनिया गांधी ने मुस्कुराते हुए देशवासियों को ‘वंदे मातरम्’ कहकर बधाई दी। उनका यह संदेश महज एक नारा नहीं, बल्कि उस सियासी तूफान का जवाब माना जा रहा है, जो पिछले दो दिनों से ‘राष्ट्रीय गीत’ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहा है।

पीएम मोदी ने नेहरू पर साधा था निशाना
दरअसल, इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला बोला। पीएम ने आरोप लगाया कि नेहरू ने मोहम्मद अली जिन्ना की तरह ही ‘वंदे मातरम्’ का विरोध किया था, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे “मुसलमान नाराज हो सकते हैं”। पीएम के इस बयान के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच इतिहास को लेकर बहस छिड़ गई है।
प्रियंका का पलटवार: ‘बंगाल चुनाव के लिए हो रही सियासत’
पीएम मोदी के आरोपों का जवाब देने के लिए राहुल गांधी की जगह उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा आगे आईं। वायनाड सांसद प्रियंका ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए बंगाली उपन्यासकार बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ को विवाद में घसीट रही है।
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प्रियंका ने कहा कि भाजपा नेहरू के बयानों और सरदार पटेल को लिखे उनके पत्रों को ‘सिलेक्टिव’ तरीके से और बिना संदर्भ के पेश कर रही है, ताकि पूर्व पीएम को पक्षपाती साबित किया जा सके।
अमित शाह ने याद दिलाया 1937 का इतिहास
प्रियंका गांधी के पलटवार पर गृह मंत्री अमित शाह ने करारा जवाब दिया। शाह ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है कि ‘वंदे मातरम्’ पर बात इसलिए हो रही है क्योंकि बंगाल चुनाव आ रहे हैं। यह सच है कि बंकिम बाबू बंगाल में पैदा हुए थे, लेकिन यह गीत सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है।” शाह ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने 1937 के अधिवेशन में “सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ावा देकर” राष्ट्रीय गीत का अपमान किया था और तुष्टिकरण के लिए इसके छोटे संस्करण को अपनाया था।
इसी गर्मागर्म बहस के बीच सोनिया गांधी का ‘वंदे मातरम्’ कहना कांग्रेस की तरफ से भाजपा के राष्ट्रवाद के मुद्दे पर एक सधा हुआ जवाब माना जा रहा है।





