भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। बाजार में चौतरफा बिकवाली देखी जा रही है। सभी मुख्य इंडेक्स दो से ढाई प्रतिशत टूट चुके हैं। निवेशकों के लाखों करोड़ रुपए स्वाहा हो चुके हैं। निफ्टी में करीब 700 प्वाइंट की गिरावट देखी जा रही है। वहीं सेंसेक्स 2000 प्वाइंट से ज्यादा लुढ़क चुका है। निफ्टी बैंक में 2100 प्वाइंट से ज्यादा की गिरावट देखी जा रही है।

सभी इंडेक्स भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो, ऑयल एंड गैस और सरकारी बैक इंडेक्स में देखी जा रही है। निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 5 परसेंट टूट चुका है।
ईरान वॉर के लंबा खिंचने की आशंका से दुनियाभर के बाजारों में कोहराम मचा है। अगर अमेरिकी बाजार की बात करें तो डाओ फ्यूचर में करीब 900 प्वाइंट की गिरावट देखी जा रही है। S&P फ्यूचर भी डेढ़ प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। वहीं नैस्डेक फ्यूचर में करीब दो प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। जापानी बाजार का भी कुछ ऐसा ही हाल है। निक्केई में करीब 3000 प्वाइंट की गिरावट देखने को मिल रही है। हांगकांग का बाजार भी लहूलुहान दिख रहा है, हेंगसेंग में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। कोरिया और सिंगापुर का भी यही हाल है। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में गिरावट पर लगाम लगाने के लिए सर्किट लगाना पड़ा। लेकिन चीन के बाजार में इतना ज्यादा दबाव नहीं दिख रहा है। शंघाई में करीब आधा प्रतिशत की गिरावट है।
ईरान पर अमेरिका और इजराइल मिलकर बमबारी जारी रखे हुए हैं। जिसका ईरान मुंहतोड़ जवाब देते हुए इजराइल के साथ ही एक दर्जन से ज्यादा देशों पर हमला कर रहा है। इन देशों में स्थित अमेरिकी आर्मी बेस को निशाना बनाया जा रहा है। युद्ध की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है। जिससे एक कारोबारी दिन में कच्चे तेल के दाम 93 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। पिछले 40 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक दिन में तेल की कीमतों में इतनी तेजी देखने को मिली है।
बढ़ती तेल की कीमतों का असर भी भारतीय बाजारों पर दिख रहा है। हम आपको बता दें कि भारत अपनी जरूरतों का करीब 80 फीसदी तेल खरीदता है, यानी इंपोर्ट करता है। और अगर रिजर्व क्रूड की बात करें तो भारत के पास करीब डेढ़ महीने के लिए रिजर्व क्रूड रहता है। यानी हम डेढ़ महीने तेल इंपोर्ट नहीं भी करें तो काम चल जाएगा, लेकिन उसके बाद आफत आ जाएगी। हालांकि तेल के दाम बढ़ने के बाद सऊदी अरब का बयान आया है कि वह ऑयल मार्केट में अपना तेल भेजेगा ताकि कीमतों पर लगाम लगाई जा सके। इस आश्वासन के बाद दुनियाभर के बाजारों ने थोड़ी राहत की सांस ली है।
Also Read- ICC मेन्स T20 विश्व कप 2026 चैंपियन बनी टीम इंडिया, लगातार दूसरी बार, कुल तीसरी बार जीता खिताब





