Home झारखंड बिहार राजनीति मनोरंजन क्राइम हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

अंधविश्वास या आस्था? जमशेदपुर में हरमंगेया पर्व पर 2 बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह कुत्तों के साथ, सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई

On: February 16, 2026 5:56 PM
Follow Us:
अंधविश्वास या आस्था? जमशेदपुर में हरमंगेया पर्व पर 2 बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह कुत्ते के साथ, सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई
---Advertisement---

जमशेदपुर में हरमंगेया पर्व में बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह कुत्तों  के साथ कराया गया। हो जनजाति की सदियों पुरानी परंपरा के तहत ये आयोजन किया गया है। जमशेदपुर के शंकोसाई रोड नंबर 5 स्थित बस्ती में मागे पर्व के अंतिम दिन ‘हरमंगेया’ के अवसर पर समाज की पुरानी परंपरा के तहत दो छोटे बच्चों का प्रतीकात्मक विवाह मादा कुत्ते के साथ संपन्न कराया गया।

add

समाज के बुजुर्गों के अनुसार जिन बच्चों के ऊपर के दांत पहले निकलते हैं उन्हें अशुभ ग्रह का संकेत माना जाता है। भविष्य में किसी अनहोनी या दुर्घटना से बचाव के लिए परंपरागत रूप से ऐसे बच्चों का कुत्ते या मादा कुत्ते के साथ विवाह किया जाता है। यह प्रथा सदियों पुरानी है और समाज के कुछ हिस्सों में आज भी निभाई जाती है।

बारात और पारंपरिक रस्में

इस साल इस अनुष्ठान में अजय हेंब्रम के चार वर्षीय पुत्र रूपेश हेंब्रम और लक्ष्मण सोय के दो वर्षीय पुत्र सूर्य सोय की अलग-अलग बारात निकाली गई। गाजे-बाजे के साथ बस्ती में बारात घुमाई गई। इस बारात में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। समधी मिलन, मंगनी, हल्दी और पांव पूजा जैसी पारंपरिक रस्में निभाई गईं। इसके बाद साड़ पेड़ के नीचे विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया। समाज का विश्वास है कि साड़ पेड़ के नीचे विवाह कराने से बच्चों का ग्रह दोष पेड़ ग्रहण कर लेता है और दोष समाप्त हो जाता है।

परंपरा और सांस्कृतिक महत्व

ट्राइब्स रीति रिवाजों के जानकार और बुजुर्ग बताते हैं कि यह रिवाज बच्चों की सुरक्षा और भविष्य की शुभता के लिए निभाया जाता रहा है। हालांकि आधुनिक समय में यह असामान्य प्रतीत हो सकता है फिर भी समाज इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक आस्था का हिस्सा मानता है।

प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में भी आने वाले कुछ दिनों में हरमंगेया पर्व मनाया जाएगा। जहां इसी तरह के पारंपरिक अनुष्ठानों की तैयारी की जा रही है। यह पर्व न केवल समाज की परंपराओं को जीवित रखता है। बल्कि इसे सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का प्रतीक भी मना जाता है।

Also Read- असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने दिया इस्तीफा

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment