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हजारीबाग निर्भया का भयावह सच, अंधविश्वास में मां ने ही दी 12 वर्षीय बेटी की ‘नरबलि’

On: April 2, 2026 3:36 PM
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हजारीबाग निर्भया का भयावह सच, अंधविश्वास में मां ने ही दी 12 वर्षीय बेटी की ‘नरबलि’
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झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय लड़की की हत्या मामले का भयावह सच सामने आ चुका है। जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। कुसुंभा गांव में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के नाम पर कर दी गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस जघन्य अपराध में मृतका की अपनी मां भी शामिल पाई गई है।

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तीन आरोपियों में मां भी शामिल

पुलिस ने इस मामले में मृतका की मां रेशमी देवी, महिला तांत्रिक शांति देवी (भगतिनी) और उनके सहयोगी भीम राम को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों आरोपी एक ही गांव के रहने वाले हैं।
हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे मामले का खुलासा किया।

बेटे को ठीक करने के लिए ‘बलि’ का झांसा

पुलिस जांच में सामने आया है कि रेशमी देवी अपने छोटे बेटे की शारीरिक और मानसिक बीमारी को लेकर काफी परेशान थी। वह पिछले एक साल से गांव की तांत्रिक शांति देवी के संपर्क में थी।
तांत्रिक ने उसे विश्वास दिलाया कि बेटे को ठीक करने के लिए ‘कुंवारी कन्या’ की बलि देना जरूरी है। इसी अंधविश्वास में आकर मां ने अपनी ही बेटी की हत्या की साजिश रच डाली।

24 मार्च की रात को दिया गया वारदात को अंजाम

घटना 24 मार्च यानी दुर्गा अष्टमी की रात की है। गांव में रामनवमी से पहले ‘मंगला जुलूस’ निकाला जा रहा था। इसी दौरान मां अपनी बेटी को बहला-फुसलाकर तांत्रिक के घर ले गई।
वहां तंत्र-मंत्र की कथित प्रक्रिया के बाद बच्ची को सुनसान स्थान पर ले जाकर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार तांत्रिक के निर्देश पर भीम राम ने बच्ची का गला घोंट दिया जबकि मां ने उसके पैर पकड़ रखे थे ताकि वह विरोध न कर सके।

हत्या के बाद शव के साथ बर्बरता

जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद बच्ची के शव के साथ बर्बरता की गई। तांत्रिक क्रिया के नाम पर प्राइवेट पार्ट से खून निकालकर पूजा की गई।
इसके बाद शव को गांव के पास बांस की झाड़ियों में फेंक दिया गया।

दुष्कर्म का रूप देकर गुमराह करने की कोशिश

मामले को दूसरी दिशा देने के लिए मृतका की मां ने खुद ही एक व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।
हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में यह दावा झूठा साबित हुआ।

एसआईटी जांच में हुआ खुलासा

मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड डीजीपी के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी नागरगोजे शुभम भाउसाहेब कर रहे थे।
तकनीकी साक्ष्य और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और गहन पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। आरोपियों ने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है।

हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

इस हृदयविदारक घटना पर झारखंड हाई कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लेकर राज्य प्रशासन से जवाब मांगा था।

प्रदेश में आक्रोश सख्त सजा की मांग

घटना के बाद पूरे झारखंड में भारी आक्रोश है। विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।

अंधविश्वास की भयावह सच्चाई

यह घटना समाज में फैले अंधविश्वास और कुप्रथाओं की खतरनाक हकीकत को उजागर करती है। जहां एक मां ही अपनी बेटी की जान लेने पर उतारू हो जाती है।
यह सिर्फ एक अपराध नहीं बल्कि मानवता को झकझोर देने वाली त्रासदी है। इस हत्या को लेकर 30 मार्च को बीजेपी ने हजारीबाग बंद का एलान किया था। भाजपा ने हत्या मामले में खुलासा करने को लेकर हजारीबाग जिला प्रशासन को बधाई दी है। हजारीबाग से भाजपा के विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि गुमराह किए जाने के बावजूद प्रशासन ने बड़ी सावधानी के साथ इस कृत्य में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके लिए प्रशासन बधाई के पात्र है।

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