चंद्रग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:19 बजे से प्रारंभ होगा और इसकी समाप्ति अगले दिन, 8 सितंबर को रात 1:26 बजे होगी। मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है और इस दौरान कई धार्मिक क्रियाएं वर्जित होती हैं।

इस खंड चंद्रग्रहण की शुरुआत रात 9:57 बजे होगी, जबकि इसका मोक्ष यानी समापन 1:26 बजे होगा। वहीं, खग्रास चंद्रग्रहण की अवधि रात 11:01 बजे से लेकर 12:23 बजे तक रहेगी।
यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा यूरोप, एशिया, अफ्रीका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अटलांटिक क्षेत्र में भी देखा जा सकेगा।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही, इस अवधि में ध्यान, जप, और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह चंद्रग्रहण 12 राशियों और 27 नक्षत्रों पर प्रभाव डालेगा। कुछ लोगों के लिए यह समय लाभकारी साबित हो सकता है, जबकि अन्य को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सूतक काल में क्या करें, क्या न करें
सूतक काल में भोजन, पूजा, और अन्य शुभ कार्यों से परहेज करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। इस दौरान भगवान का ध्यान, मंत्रोच्चार, और शांत चित्त से समय व्यतीत करना उत्तम माना गया है।





