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देश में आदिवासियों की धार्मिक-सांस्कृतिक को लेकर छिड़ी बहस:आखिर कौन है आदिवासी ?

On: May 28, 2026 7:12 PM
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देश में आदिवासियों की धार्मिक-सांस्कृतिक को लेकर छिड़ी बहस: आखिर कौन है?आदिवासी
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देश में आदिवासियों की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को लेकर इस वक्त एक बेहद संवेदनशील और बड़ी बहस छिड़ गई है। कि आदिवासी आखिर कौन है? भले ही यह देखने में एक सदाहरण आस्था और पहचान का विवाद लगता है। लेकिन इस विवाद की अंदरूनी परतों को ध्यान से समझेंगे तो आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार और आरक्षण से जुड़ा है। अगर पार्टियों के लिहाज से देखेंगे तो राजनीतिक पार्टियों को इससे नफा-नुकसान के बड़े समीकरण भी इसके छिपे हुए हैं। यही कारण है कि राजनीतिक पार्टियों इसकी विश्लेषण को अपने अपने ढंग से पेश कर रही है। लेकिन इसके बहस में तीन शब्द सामने आ रहे है। सरना सनातन ईसाई

देश में आदिवासियों का पिछले कई दशकों से मांग चलती आ रही है कि उन्हें सरना धर्म कोड दे दिया जाए। सरना धर्म कोड को लेकर कहीं आंदोलन भी किए गए। जनगणना में इन्हें अलग धार्मिक अधिकार दिया जाए और उनके लिए एक धर्म कॉलम अलग से बनाया जाए। इसके समर्थन में। झारखंड के सत्तारूढ़ पार्टी JMM और कांग्रेस भी है। वही दूसरी ओर आरएसएस समर्थित बीजेपी पार्टी भी है जो सरना और सनातन को एक मानती है। साथ ही, वे ‘डीलिस्टिंग’ की मांग कर रहे हैं ताकि ईसाई या इस्लाम धर्म अपनाने वाले आदिवासियों को ST आरक्षण की सूची से बाहर किया जा सके। सरना और सनातन मानने वाले एक हैं बस उनकी पूजा करने की पद्धति अलग-अलग है।

वही एक तपका ऐसा है जो सामाजिक और धार्मिक कार्यकर्ताओं की है जिनका तर्क है कि जो लोग प्रकृति की पूजा सखुआ और साल के वृक्ष की पूजा करते हैं। इनका कहना है कि आदिवासियों में किसी मूर्ति, मंदिर, या ग्रंथ की पूजा नहीं होती। यह आम धर्मों से बिलकुल अलग है इसलिए हमें सरना धर्म कोड की पहचान दे कर धार्मिक मान्यता दी जाए। इन लोगों का यह भी कहना है कि जब हमारी धार्मिक पहचान हो जाएगी तो डीलिस्टिंग स्वतः ही हो जाएगा। वर्तमान में उन्हें अलग धर्म कोड नहीं मिलने से की अन्य धर्म में गिनती की जा रही है।

अब आते हैं तीसरे पक्ष की ओर जिनका मानना है कि आदिवासी जन्म और नस्ल से होते हैं न कि धर्म से। चुकी आदिवासी की कोई धर्म नहीं दिया गया है तो वो अन्य धर्मों को भी मान सकते है। वे डीलिस्टिंग को असंवैधानिक बताते हैं। उनका कहना है कि डीलिस्टिंग करना है तो वैसे आदिवासियों को भी करे जो ईसाई के अलावा अन्य धर्म को अपनाए है।

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